church property vs waqf board : RSS के मुखपत्र का दावा, चर्च के पास वक्फ से ज्यादा प्रॉपर्टी!
church property vs waqf board : 3 अप्रैल 2025 को RSS के मुखपत्र ऑर्गनाइज़र में प्रकाशित एक आर्टिकल ने चर्च की संपत्ति को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस आर्टिकल का शीर्षक था “हू हैज़ मोर लैंड इन इंडिया? द कैथोलिक चर्च वर्सेस वक्फ बोर्ड डिबेट” यानी “भारत में किसके पास ज्यादा जमीन है, वक्फ बोर्ड या कैथोलिक चर्च?” इस आर्टिकल के बाद चर्चों की संपत्ति पर चर्चा और विवाद तेज़ हो गया है, खासकर चर्च के पास कुल 17 करोड़ एकड़ जमीन होने का दावा किए जाने के बाद।
चर्च की संपत्ति पर विवाद
RSS के मुखपत्र ने यह दावा किया कि कैथोलिक चर्च के पास भारत में 17 करोड़ एकड़ जमीन है, जो वक्फ बोर्ड से भी कहीं अधिक है। यह दावा चर्च की संपत्ति को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है, क्योंकि वक्फ बोर्ड की संपत्ति पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा रही है। वक्फ बोर्ड को लेकर कई बार यह चर्चा हो चुकी है कि इसका नियंत्रण और संपत्ति की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

चर्च की संपत्ति की बात करें तो यह न केवल धार्मिक स्थलों और चर्चों तक सीमित है, बल्कि इसके अंतर्गत स्कूल, अस्पताल, और अन्य शैक्षिक संस्थान भी शामिल हैं, जिनके पास काफी बड़ी ज़मीन है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या इस संपत्ति को लेकर कोई कानून बनाया जाएगा?
राहुल गांधी का बयान
RSS के इस आर्टिकल के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे “धार्मिक समुदायों पर हमला” करार देते हुए कहा, “अब ईसाईयों को निशाना बनाया जा रहा है। इस तरह की बयानबाजी देश में धार्मिक विभाजन को बढ़ावा देती है और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाती है।” राहुल गांधी का यह बयान चर्च के खिलाफ इस तरह के विवादों को और हवा दे सकता है, जो पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक विवादों का कारण बने हुए हैं।
क्या चर्च पर बनेगा कानून?
चर्च की संपत्ति को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या वक्फ बोर्ड के समान चर्चों पर भी कोई कानून बनाया जा सकता है। वक्फ संपत्तियों के नियंत्रण और ट्रांसपेरेंसी के लिए पहले से कई कानूनी प्रयास किए जा चुके हैं। अब चर्च की संपत्ति को लेकर सरकार क्या कदम उठाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यह मुद्दा धार्मिक संगठनों के अधिकारों के साथ-साथ संपत्ति के वैध उपयोग पर भी बहस छेड़ सकता है।
चर्च की संपत्ति कैसे बढ़ी?
चर्चों की संपत्ति का इतिहास काफी पुराना है। भारत में चर्चों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों के लिए अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा जुटाया है। बहुत से चर्चों ने दान से या सरकारी मदद से संपत्ति प्राप्त की है, लेकिन कुछ चर्चों के पास बड़ी संपत्तियों का संग्रह भी है, जो अभी विवाद का कारण बन रहा है।

संपत्ति के असली मालिकाना हक को लेकर कई सवाल उठते हैं, और यह भी कि क्या इन संपत्तियों को पारदर्शी तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। वक्फ बोर्ड के मामले में पहले ही कई सुधारों की आवश्यकता महसूस की गई थी, अब चर्च की संपत्ति पर भी यही सवाल उठ सकते हैं।
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RSS के मुखपत्र के आर्टिकल ने चर्च की संपत्ति पर एक बड़ा विवाद छेड़ दिया है, और अब यह देखना होगा कि इस मुद्दे पर क्या कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आती हैं। धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के बारे में कानून बनाने की संभावना से समाज में एक नया विवाद पैदा हो सकता है। इस मामले पर अब सरकार, राजनीतिक दल और धार्मिक संगठन किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, यह भविष्य में महत्वपूर्ण होगा।
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