Cat Crossing Your Path: भारतीय समाज में परंपराएं, मान्यताएं और अंधविश्वास गहराई से रचे-बसे हैं। इन मान्यताओं में से एक बेहद आम और प्रचलित धारणा है – “बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ होता है।” आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में लोग अगर रास्ते में बिल्ली को रास्ता काटते देख लें, तो रुक जाते हैं, कुछ पल ठहरते हैं या फिर कोई टोटका करते हैं। लेकिन क्या वाकई बिल्ली का रास्ता काटना किसी अनिष्ट का संकेत है, या यह केवल सदियों पुरानी एक सामाजिक भ्रांति है? आइए इस विषय की तह तक जाते हैं।
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इस मान्यता की जड़ें कहां हैं?
बिल्ली से जुड़ी मान्यताओं की जड़ें प्राचीन समय से जुड़ी हैं। भारत में यह विश्वास कई सदियों से चला आ रहा है कि यदि कोई बिल्ली खासकर काली बिल्ली आपके रास्ते को पार करती है, तो वह अपशगुन का संकेत है।
ऐसा माना जाता है कि बिल्ली का रास्ता काटना किसी…
अनजाने खतरे, नुकसान या असफलता का संकेत देता है।
बिल्ली – एक सहज स्वाभाविक प्राणी..
यदि हम विज्ञान और प्रकृति के दृष्टिकोण से देखें, तो बिल्ली भी एक सामान्य जीव है जो इंसानों की तरह रास्ता चलती है, उछलती-कूदती है और अपने स्वाभाविक व्यवहार के अनुसार काम करती है।बिल्ली का किसी के रास्ते को काटना महज संयोग हो सकता है। वह न तो किसी की सफलता या विफलता तय करती है, और न ही उसके कार्य में रुकावट लाने की शक्ति रखती है।
पशु विशेषज्ञों और जीवविज्ञानियों का मानना है कि बिल्लियां अत्यंत संवेदनशील, सतर्क और स्वतंत्र प्रवृत्ति की होती हैं। वे अपने आसपास के माहौल को ध्यान से देखती हैं और उसी आधार पर अपनी दिशा तय करती हैं। ऐसे में यह कहना कि उनका रास्ता काटना अपशकुन है, विज्ञान के बिल्कुल विपरीत है।

धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण…
भारत में विभिन्न धर्मों और सांस्कृतिक मतों में बिल्लियों के प्रति दृष्टिकोण अलग-अलग है।
1. हिंदू धर्म में बिल्लियों को देवी शष्ठी के वाहन के रूप में भी देखा जाता है, जो संतान की रक्षा और प्रजनन से जुड़ी देवी हैं। कुछ स्थानों पर इनकी पूजा भी की जाती है।
2. वहीं कुछ लोक कथाओं और ग्रामीण किंवदंतियों में बिल्लियों को चालाक, रहस्यमयी या धोखेबाज के रूप में चित्रित किया गया है, जिससे उनके प्रति नकारात्मक सोच बनी।
लेकिन स्पष्ट रूप से किसी धार्मिक ग्रंथ या शास्त्र में यह उल्लेख नहीं है कि बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ होता है। यह केवल लोक मान्यता और परंपरा के रूप में स्थान पा गई है।
मनोविज्ञान और आत्म-भ्रम…
अंधविश्वास का मनोविज्ञान भी दिलचस्प होता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति ने कोई जरूरी काम के लिए घर से निकलते वक्त देखा कि बिल्ली ने रास्ता काटा। उसने इस बात को दिमाग में बैठा लिया कि अब कुछ बुरा हो सकता है। अब यदि वास्तव में कुछ गलत हो जाए (भले ही उसका कोई अन्य कारण हो), वह व्यक्ति इसे बिल्ली से जोड़ देता है।
यह प्रक्रिया Self-Fulfilling Prophecy कहलाती है — यानी आप जैसा सोचते हैं, वैसा घटित होता है क्योंकि आप उसी मानसिकता से अपने कार्यों को प्रभावित करते हैं।

समाज में इसका प्रभाव…
आज भी कई बार देखा जाता है कि लोग रास्ते में बिल्ली दिखने पर रुक जाते हैं, कुछ समय इंतजार करते हैं, या कोई दूसरा रास्ता पकड़ लेते हैं। कुछ लोग तो “उपाय” के तौर पर तीन बार पीछे मुड़कर थूकते हैं, या कोई पत्थर उठाकर फेंकते हैं। यह सब केवल इसलिए होता है क्योंकि यह धारणा बाल्यकाल से संस्कारों के रूप में हमारी सोच में गहराई तक समा चुकी है।
दुर्भाग्य की बात यह है कि इस अंधविश्वास के कारण बिल्लियों के साथ दुर्व्यवहार भी होता है। कई बार लोग उन्हें मारने-पीटने से भी नहीं चूकते, या घरों से दूर भगा देते हैं।
कई देशों में बिल्लियों को माना जाता है शुभ…
यह जानना रोचक है कि कुछ देशों में बिल्लियों को शुभ भी माना जाता है-
1. में “मानेकी नेको” (लकी कैट) को सौभाग्य और धन का प्रतीक माना जाता है। दुकानों और घरों में इसे सजाया जाता है।
2. मिस्र की सभ्यता में बिल्लियां पूजनीय थीं। उन्हें देवी बास्तेत का रूप माना गया था।
3. इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के कुछ हिस्सों में काली बिल्ली को घर में प्रवेश करते देखना सौभाग्य का संकेत माना जाता है।
