
cag report tamilnadu cough syrup: भारत के महालेखा परीक्षक (CAG) ने तमिलनाडु के पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ सर्विसेज से जुड़ी एक रिपोर्ट में कफ सिरप से बच्चों की मौत की घटनाओं के संदर्भ में गंभीर खुलासा किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में दवा निरीक्षण (drug inspection) में कमी रही और दवा के सैंपल कलेक्शन में भी भारी लापरवाही पाई गई। यह खुलासा तब हुआ जब मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आईं।
cag report tamilnadu cough syrup: CAG रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- दवा टेस्टिंग में कमी: 2016-17 में 1 लाख सैंपल टेस्टिंग का लक्ष्य था, लेकिन 66,331 टेस्ट किए गए, यानी 34% कम। 2020-21 में यह कमी बढ़कर 38% हो गई, और 62,358 टेस्ट हुए, जबकि लक्ष्य 1,00,800 था। 2019-20 में सबसे अधिक 40% की कमी दर्ज की गई।
- सैंपल कलेक्शन में लापरवाही:रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 और 2020-21 में 54% कमी रही, क्योंकि दवा के सैंपल कलेक्शन में आवश्यक प्रयास नहीं किए गए।
- कफ सिरप से मौतें: कफ सिरप से जुड़ी घटनाएं विशेष रूप से तब चर्चा में आईं, जब मध्य प्रदेश (MP) के छिंदवाड़ा, बैतूल, और पांढुर्णा में जहरीले कफ सिरप के सेवन से 25 बच्चों की मौत हो गई। श्रीसन फार्मास्युटिकल द्वारा निर्मित कफ सिरप कोल्ड्रिफ के सेवन से यह हादसा हुआ।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: CBI या ज्यूडिशियल जांच की मांग खारिज
कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट में CBI या ज्यूडिशियल जांच की मांग की गई थी। याचिका में यह कहा गया था कि यह लापरवाही की चरम सीमा है और जांच होनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2025 को इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने ब्रीफ सुनवाई के बाद फैसला लिया और कहा कि इस मामले की जांच राज्य सरकार के SIT (Special Investigation Team) द्वारा चल रही है।

केंद्र सरकार की ओर से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका का विरोध किया था और कहा कि यह याचिका अखबारों में आई खबरों पर आधारित है और याचिकाकर्ता के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
cag report tamilnadu cough syrup: मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थिति
मध्य प्रदेश में 25 बच्चों की मौत हो चुकी है, जो कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन के कारण हुई। सिरप बनाने वाली कंपनी के मालिक रंगनाथन को 9 अक्टूबर 2025 को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया था और उसे छिंदवाड़ा लाया गया। इस मामले में जांच SIT द्वारा की जा रही है।
तमिलनाडु की दवा जांच प्रक्रिया में खामियां
CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि तमिलनाडु में दवा जांच और सैंपल कलेक्शन में लगातार कमी रही, जिससे अवैध और खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के निर्माण और बिक्री को रोकने में दिक्कत आई। रिपोर्ट के अनुसार, जब तक इन प्रक्रियाओं में सुधार नहीं किया जाता, तब तक इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति संभव है।

