Bundelkhand Temple Bats Worship: खबर उत्तरप्रदेश के हमीरपुर से है जहां चौरा देवी मंदिर में चमगादड़ करते हैं मां शक्ति की आराधना,बतादें की राजधानी लखनऊ से लगभग 200 किलोमीटर दक्षिण में बसा प्रदेश का ऐसा जिला,जहां स्थिति है देवी का एक ऐसा स्थान जहां शक्ति के साधक सिर्फ इंसान नहीं,खग वृक्ष भी हैं।
नवरात्र के पावन महीने में आज हम आपको बताएंगे हमीरपुर के चौरा देवी मंदिर की कहानी,चमगादड़ों की शक्ति साधना का रहस्य क्या? घंटियों की आवाज से चमगादड़ों के गुणानुवाद करने की कहानी।

देवी के भक्त कैसे बने चमगादड़
जानकारी के लिए बतादें कि इस स्थान को नाम चौरा देवी है,बुंदेलखंड के हमीरपुर जिला के पास में ही स्थित है देवी का यह अदभुत धाम, यहां दर्शन करने के लिए सिर्फ हमीरपुर नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी श्रद्धालू आते हैं,अगर आप भी हमीरपुर में देवी का दर्शन करना चाहते हैं तो जिले में उतरकर किसी सी शख्स से पूछ लीजिए कि चौरा देवी जाना है,वो बिना किसी प्रश्न के देवी धाम का रास्ता बता देगा।
चौरा देवी की मंदिर प्राचीन है,कितना प्राचीन है भक्तों को भी नहीं पता
बतादें कि मंदिर के पास में ही एक वट वृक्ष है,बरगद का ये पेड़ कितना पुराना है इसके बारे में भी श्रद्धालुओं को भी नहीं पता..श्रद्धालु बताते हैं कि जिस जगह पर मां का मंदिर है वहां कभी जंगल हुआ करता था। इस जंगल में अनेकों प्रकार के वृक्ष थे उसी में एक वृक्ष बरगद का भी है,जिसमें चमगादड़ रहते हैं।मेडिकल साइंस में चमगादड़ में इंसानों के लिए खतरनाक माना जाता है,क्योंकि इनकी वजह से कई बीमारियां हो सकती है। लेकिन चौरा देवी के श्रद्धालू इन्हें अशुभ और हानिकारक नहीं मानते।

मंदिर के आसपास ही रहते हैं चमगादड़
यहां भक्तों की मान्यता है कि मंदिर में जब पूजा आरती होती है तो ये चमगादड़ मंदिर के आसपास मड़राने लगते है,प्रसाद वितरण के समय चमगादड़ों का भी ख्याल रखा जाता है। चमगादड़ों को अलग से प्रसाद वितरण के दौरान चमगादड़ों का भी ख्याल रखा जाता है,चमगादड़ों को अलग से प्रसाद दे दिया जाता है,जिससे बाद में वो शांत हो जाते हैं।
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जानकारी के लिए बतादें कि चमगादड़ों के बिषय मे चौरा देवी के भक्तों की मान्यता है कि हजारों साल पहले इस स्थान पर चमगादड़ों के देवता की मौत हुई थी,उन्हें यहीं दफनाया गया था,तब से मंदिर के आसपास ही ये घूमते औऱ मड़राते रहते हैं। बतादें कि करीब ही यमुना नदी का जल पीकर वे अक्सर मंदिर की चौखट तक आ जाते हैं,उसी समाधि की सुरक्षा करते हैं।
मां चौरा देवी और चमगादड़ों का अटूट है रिश्ता
भक्तों का मानना है चौरा देवी मंदिर और चमगादड़ों का रिश्ता अटूट है, जो भी श्रद्धालु यहां आते हैं पूजा पाठ करते हैं और चमगादड़ों को प्रसाद चढ़ाते हैं उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।
चमगादड़ो के प्रसाद खाने को लेकर बोले वैज्ञानिक जलीज खान
Bundelkhand Temple Bats Worship: चमगादड़ों के प्रसाद खाने को लेकर जीव वैज्ञानिक जलीज खान कहते हैं कि चमगाजड़ राडार की तरह तरंगे पकड़ कर दुश्मनों और भोजन का पता लगा लेते हैं। घंटी आवाज से निकलती तरंगों का पीछा करके ये मंदिर तक पहुंच जाते हैं और फिर भोजन करके लौट जाते हैं। जलील कहते हैं कि चमगादड़ ज्यादातर ठंडी जगहों पर या अँधेरी गुफाओं में रहते हैं, लेकिन चौरा देवी मंदिर के पास लाखों की संख्या में इनकी मौजूदगी चौकाने वाली है।
स्वहनेश कुमार,संवाददाता,हमीरपुर
