बुंदेलखंड राज्य बनाने की उठी मांग
Bundelkhand State Demand: खबर मप्र के सागर जिले से है जहां बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर ज़ोर पकड़ गई है। बुंदेलखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें पृथक बुंदेलखंड राज्य की पुरजोर मांग की गई।
यह ज्ञापन राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर सत्येन्द्र पाल सिंह के मुख्य आतिथ्य में और सागर जिलाध्यक्ष मोनू पटेल के नेतृत्व में सौंपा गया। चूंकि कलेक्टर सागर अनुपस्थित थे, इसलिए ज्ञापन प्रभारी अधिकारी को सौंपा गया।
इस दौरान कुंवर सत्येन्द्र पाल सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य के बिना इस क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। हम अंतिम सांस तक इसके लिए संघर्ष करते रहेंगे।

उन्होंने सागर को बुंदेलखंड का ‘दिल’ बताते हुए कहा कि अगर बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा नहीं मिला, तो यह क्षेत्र हमेशा पिछड़ा ही रहेगा।
इतिहास की झलक
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि…
- 1948 में बुंदेलखंड राज्य का गठन हुआ था।
- 1950 में उसका नाम विंध्य प्रदेश रख दिया गया।
- और 1956 में हुए राज्य पुनर्गठन में इसे समाप्त कर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बाँट दिया गया — जिसे इस क्षेत्र के साथ घोर अन्याय बताया गया।
तथ्यात्मक आधार
बुंदेलखंड की 2011 की जनगणना के अनुसार …
- जनसंख्या: 1.83 करोड़ से अधिक
- क्षेत्रफल: 70,592 वर्ग किमी
इन आँकड़ों के आधार पर यह क्षेत्र एक सक्षम और पूर्ण राज्य बनने की पूरी पात्रता रखता है।
उपस्थित प्रमुख लोग
Bundelkhand State Demand: इस मौके पर कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें शामिल थे –
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर सिंह, राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद नईम मंसूरी, झांसी जिलाध्यक्ष विनोद वर्मा, डॉ. विवेक तिवारी, संतोष विश्वकर्मा, संजय विश्वकर्मा, सुजीत विश्वकर्मा, सचिन कुमार, विनीत शर्मा, गौतम बाबरे, आकाश ठगेले, और दुर्गा प्रसाद।
