bulgaria roses uttarakhand farming : उत्तराखंड में बल्गेरियाई गुलाबों की सुगंध से बदल रही किसानों की किस्मत
bulgaria roses uttarakhand farming : उत्तराखंड की हिमालयी पहाड़ियों में जब बंजर भूमि पर सिर्फ कठिनाई और संघर्ष थे, तो अब वहीं बल्गेरियाई गुलाबों की खुशबू किसानों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लेकर आ रही है। यह वही भूमि है जो कभी खेतों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती थी, लेकिन अब यह गुलाबी और सफेद रंगों से सजी हुई है, जिसमें बल्गेरियाई गुलाबों की ताजगी और सुगंध फैल रही है।
सूरज की पहली किरण जैसे ही गुलाबों पर पड़ती है, वह रंग-बिरंगे गुलाबों की पंक्तियों को और भी जीवंत बना देती है। यह दृश्य बल्गेरिया के किसी पोस्टकार्ड जैसा प्रतीत हो सकता है, लेकिन यह खूबसूरत तस्वीर उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों की है, जहां अब गुलाबों की खेती से आर्थिक समृद्धि का एक नया रास्ता खुल रहा है।
समस्याओं के बीच गुलाबों ने खोला एक नया रास्ता
किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार अब विभिन्न फसलों पर प्रयोग कर रही है, जो पहाड़ी इलाकों की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उगाई जा सकती हैं। ऐसे में बल्गेरियाई गुलाब, जिसे रोजा डेमास्केना कहा जाता है, एक नया सुगंधित खेती का विकल्प बनकर उभरा है। यह फूल न केवल अपनी सुंदरता और खुशबू से इलाके को महकाते हैं, बल्कि इसके तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत अधिक हैं – 15 लाख रुपये प्रति लीटर।
यह कम पानी में उगने वाली फसल है और इसे बंजर ज़मीन पर भी आसानी से उगाया जा सकता है। इसके अलावा, यह जंगली जानवरों से भी सुरक्षित रहता है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में खेती के लिए एक बड़ी समस्या होती है।
किसानों को मिल रहा स्थायी समाधान
किसानों के लिए बल्गेरियाई गुलाब अब केवल एक फूल नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का रास्ता बन चुका है। एक बार रोपने के बाद, यह पौधा 15 साल तक उपज देता है, और किसानों को सतत आय का स्रोत प्रदान करता है। जो लोग पहले खेती छोड़ने पर विचार कर रहे थे, उन्हें अब इस फूल की खेती से एक स्थायी समाधान मिल रहा है।

इसके अलावा, इसे बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती, और यह मौसम के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए आदर्श फसल साबित हो रही है।
इतिहास और शोध का एक अनूठा मेल
यह गुलाब का प्रजाति पहली बार मुगल काल में भारत लाई गई थी, और इसका प्रयोग 1989 में कश्मीर में किया गया था। अब, 30 किलोमीटर दूर देहरादून स्थित उत्तराखंड सुगंधित पौधा केंद्र पर इस फूल पर काफी शोध किया गया है। केंद्र में कई शोध कार्य और परीक्षणों के बाद, बल्गेरियाई गुलाब की खेती अब उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर की जा रही है।
निपेंद्र चौहान, सुगंधित पौधा केंद्र के निदेशक ने बताया कि, “यह गुलाब अन्य फसलों की तरह अधिक पानी की मांग नहीं करता। यह बंजर ज़मीन पर भी कम पानी में जीवित रह सकता है और एक बार लगाने के बाद 15 साल तक उपज देता है।”
उत्तराखंड में खुशहाली का नया अध्याय
यह बल्गेरियाई गुलाब उत्तराखंड के किसानों के लिए आशा का एक नया स्रोत बनकर उभरा है। पहाड़ी इलाकों में जहाँ खेतों की उपज घटने लगी थी, वहीं अब यह गुलाब किसानों के जीवन में एक नई रोशनी ला रहा है।
यह फूल न केवल किसान की जीवनशैली को बेहतर बना रहा है, बल्कि राज्य के लिए आर्थिक विकास का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा, बल्गेरियाई गुलाब की खेती ने पर्यावरण के प्रति जागरूकता को भी बढ़ाया है, क्योंकि यह पौधा सतत कृषि के सिद्धांतों पर आधारित है।
किसानों के लिए एक स्थायी और लाभकारी विकल्प
बल्गेरियाई गुलाब की खेती में कम संसाधनों के साथ भी शानदार लाभ प्राप्त किया जा सकता है, और यह खेती सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं, बल्कि अन्य पहाड़ी इलाकों के लिए भी एक आदर्श बन सकती है।
यह न केवल पर्यावरण को लाभ पहुंचाता है, बल्कि यह एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में किसानों को नया जीवन प्रदान कर रहा है। किसानों को यह समझ में आ चुका है कि गुलाबों की खेती सिर्फ सौंदर्य का ही नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का भी स्रोत बन सकती है।
Click this:- Download Our News App For Latest Update and “Follow” whatsapp channel
Watch Now:- Nation Mirror पर भोपाल नगर निगम कमिश्नर Exclusive Interview
Read More:- PACL Scam : राजस्थान के पूर्व मंत्री खाचरियावास के घर ED की रेड, 19 ठिकानों पर छापा
