ब्राजील में तख्तापलट की साजिश का आरोप
ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को घर में नजरबंद रखने का आदेश दिया है। अदालत ने उन्हें इलेक्ट्रॉनिक एंकल मॉनिटर पहनने और सभी डिजिटल डिवाइसेज़ जब्त करने का निर्देश भी दिया है। यह आदेश 2022 के राष्ट्रपति चुनावों के बाद तख्तापलट की कथित साजिश में उनकी भूमिका को लेकर दिया गया है।

क्या है मामला?
ब्राजील के सरकारी वकीलों ने बोल्सोनारो पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने चुनाव हारने के बावजूद सत्ता में बने रहने के लिए सैन्य तख्तापलट की योजना बनाई। सुप्रीम कोर्ट और न्यायमूर्ति अलेक्जेंड्रे डि मोरायस को निशाना बनाने की साजिश रची। राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा की हत्या की योजना में भी शामिल थे।सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही बोल्सोनारो पर रात्रिकालीन कर्फ्यू और सार्वजनिक बयान देने की रोक जैसे एहतियाती प्रतिबंध लगा दिए थे, जिनका उन्होंने उल्लंघन किया।
रैली से और बढ़ीं मुश्किलें
रविवार को रियो डी जेनेरियो के कोपाकबाना बीच पर समर्थकों की रैली में बोल्सोनारो ने अपने बेटे के मोबाइल से वीडियो संदेश में कहा:
“गुड आफ्टरनून कोपाकबाना, गुड आफ्टरनून माय ब्राजील, यह हमारी आज़ादी के लिए है।”
कोर्ट ने इसे प्रतिबंधों की अवहेलना माना और तत्काल नज़रबंदी का आदेश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
न्यायमूर्ति अलेक्जेंड्रे डि मोरायस ने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि गंभीर लोकतांत्रिक उल्लंघन का संकेत है।
कोर्ट ने साफ किया कि: बोल्सोनारो के बयान नियमों का खुला उल्लंघन हैं। उनके डिजिटल संचार पर पूरी निगरानी की जाएगी। कोई भी राजनीतिक भड़काऊ गतिविधि दंडनीय होगी।
बोल्सोनारो का पक्ष: “यह अभिव्यक्ति की आज़ादी है”
बोल्सोनारो के वकीलों ने इस फैसले को चुनौती देने की बात कही है। उनका कहना है किल“यह केवल एक राजनीतिक संदेश था, न कि तख्तापलट की योजना।”
वहीं, उनके बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने कोर्ट पर तानाशाही प्रवृत्ति का आरोप लगाया और इंस्टाग्राम से संबोधित वीडियो डिलीट कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: ट्रम्प का समर्थन
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस फैसले को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया। उन्होंने कहा
“यह लोकतंत्र नहीं, बदले की कार्रवाई है।”
ट्रम्प के इस बयान के बाद ब्राजील में राष्ट्रवादी गुटों में हलचल तेज हो गई है।
2022 में चुनाव हार, फिर आरोप
बोल्सोनारो 2019-2022 के बीच ब्राजील के राष्ट्रपति थे। 2022 के चुनाव में लुईस इनासियो लूला डी सिल्वा से हार के बाद उन्होंने चुनावी नतीजों को नकारा. सेना से सत्ता हस्तांतरण रोकने की अपील की, सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश की. इस बीच, उनके कुछ समर्थकों ने ब्राजील की संसद और न्यायालय में तोड़फोड़ भी की थी, जिसकी व्यापक आलोचना हुई।
ब्राजील में लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा
बोल्सोनारो की नजरबंदी न केवल ब्राजील में, बल्कि पूरी दुनिया में लोकतंत्र बनाम तानाशाही प्रवृत्तियों की बहस को हवा दे रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कानून का राज मजबूत होता है या राजनीतिक उथल-पुथल आगे और गहराती है।
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