Mayor’s son bold statement before CM : इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के मंच पर उस समय सब हैरान रह गए जब महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बेटे संघमित्र ने वाद-विवाद प्रतियोगिता में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए। डिबेट का उद्देश्य छात्रों की वाक्पटुता को परखना था, लेकिन इस दौरान उठाए गए मुद्दों ने इसे एक गंभीर राजनीतिक विमर्श का रूप दे दिया। खास बात यह रही कि मंच पर खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव, मंत्री और महापौर मौजूद थे।
जमीन घोटालों का मुद्दा
संघमित्र ने अपने संबोधन की शुरुआत जमीन घोटालों की ओर इशारा करते हुए की। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर कई बार जमीनों की खरीद-फरोख्त में अनियमितताएं देखने को मिली हैं। छात्रों से भरे हॉल में ये बयान गूंजते ही श्रोता तालियां बजाने लगे, लेकिन मंच पर बैठे नेताओं के चेहरों के भाव बदल गए।
बुलेट ट्रेन का वादा और हकीकत
डिबेट के दौरान संघमित्र ने बुलेट ट्रेन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “बुलेट ट्रेन सिर्फ प्रजेंटेशन से बाहर नहीं निकली है।” यानी, योजनाओं का शोर भले ही किया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी दूर दिखाई देती है। यह सवाल सुनते ही छात्रों में हलचल मच गई और कई ने इसे देश की योजनाओं और वादों का यथार्थ प्रतिबिंब बताया।
Mayor’s son bold statement before CM : रेल व्यवस्था पर आरोप
छात्र ने रेल सेवाओं पर भी कड़ा प्रहार किया। उनका कहना था कि रेल व्यवस्था आमजन की सुविधा के लिए होनी चाहिए, लेकिन इसमें दलालों का बोलबाला नज़र आता है। इस कथन ने सीधे तौर पर रेलवे प्रशासन और उस पर राजनीतिक जिम्मेदारी निभाने वालों को कठघरे में खड़ा कर दिया।
मंच पर सन्नाटा और नेताओं की प्रतिक्रिया
जब-जब संघमित्र ने कड़े सवाल उठाए, मंच पर बैठे मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के चेहरे के भाव साफ दिखाई दे रहे थे। छात्र का यह बेबाक अंदाज कई लोगों को अप्रत्याशित लगा। हालांकि, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम के अंत में कहा कि युवाओं के सवाल लोकतंत्र की ताकत हैं और इस तरह की प्रतियोगिताएँ जरूरी हैं ताकि नई पीढ़ी अपनी बात खुलकर रख सके।
इस पूरे वाकये ने इंदौर शहर में नई बहस को जन्म दे दिया है। लोग कह रहे हैं कि जब महापौर का बेटा ही सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो बाकी लोग पीछे क्यों रहें? सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा है और युवा वर्ग इसे अपनी आवाज़ का प्रतिनिधित्व मान रहा है।
इंदौर DAVV की इस वाद-विवाद प्रतियोगिता ने यह साबित कर दिया कि युवा अब सिर्फ श्रोता नहीं, बल्कि सवाल पूछने वाले नागरिक भी बन चुके हैं। मंच पर नेताओं के सामने उठी इन आवाज़ों ने सरकार और जनता के बीच संवाद की एक नई लकीर खींच दी है।
