ब्लड मून की रहस्यमयी रात: साल का आखिरी चंद्रग्रहण, क्या आपने देखा?

7 सितंबर 2025 को चंद्रग्रहण का नजारा भारतीय आकाश में एक विशेष और रहस्यमयी दृश्य था। इस दिन, साल का दूसरा और आखिरी चंद्रग्रहण 3 घंटे 28 मिनट तक चला, और रात के आकाश में छाए ब्लड मून ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं था, बल्कि एक अजीब सी सुंदरता का अहसास भी था, जिसमें चाँद का लाल-नारंगी रंग देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं था।
ग्रहण की शुरुआत और उसका अद्भुत दृश्य
यह चंद्रग्रहण रविवार रात 9:56 बजे शुरू हुआ और 1:28 बजे समाप्त हुआ। भारत में इसका शुरुआत तमिलनाडु से हुआ था, और रात 11 बजे से 12:23 बजे तक, लगभग 82 मिनट तक पूर्ण चंद्रग्रहण का दृश्य देखने को मिला। यह वो समय था, जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह से ढक चुका था, और हम सबने एक ऐतिहासिक और रहस्यमयी घटना देखी—ब्लड मून।
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आते हैं, तो सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुँच पाती। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, और चाँद का रंग लाल या नारंगी हो जाता है। इसे हम ब्लड मून कहते हैं। इस दृश्य ने पूरी दुनिया को जैसे जादू में बंध लिया।
कहाँ-कहाँ देखा गया चंद्रग्रहण?
दुनिया भर में इस ग्रहण का दृश्य बेहद खास था। भारत, एशिया, यूरोप, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में यह देखा गया। लेकिन एशिया और ऑस्ट्रेलिया में इसे सबसे अच्छे और सबसे देर तक देखा जा सका। वहीं, यूरोप और अफ्रीका में लोग इसे चाँद के निकलने के समय ही कुछ देर के लिए देख पाए।
यह चंद्रग्रहण बहुत खास था, क्योंकि 2022 के बाद भारत में यह सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण था, और इसे बिना किसी फिल्टर या चश्मे के देखा जा सका। न केवल दूरबीन, बल्कि आंखों से भी इस ग्रहण का नजारा लिया जा सकता था।

भारत में चंद्रग्रहण का रोमांच
चंद्रग्रहण ने भारत के विभिन्न हिस्सों में लोगों को आकर्षित किया। तमिलनाडु में स्कूल के बच्चों से लेकर दिल्ली, यूपी, और केरल के लोग इसे देखकर चकित रह गए। दिल्ली का नेहरू प्लेनेटेरियम, बेंगलुरु, और कोलकाता जैसे प्रमुख स्थानों पर टेलीस्कोप और कैमरों से ग्रहण के हर पल को कैद किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस चंद्रग्रहण को देखने से आपको आध्यात्मिक शांति भी मिल सकती थी, और यही वजह थी कि कई लोग मंदिरों और पवित्र स्थानों पर जा कर इस अद्भुत घटना को देखते रहे।
चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक महत्व
चंद्रग्रहण तब होता है, जब पृथ्वी और चाँद के बीच में सूर्य आ जाता है और उसकी रोशनी चाँद तक नहीं पहुँच पाती। जब चाँद पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है, तो इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहा जाता है। इसके साथ ही, जब चाँद का कुछ हिस्सा ही छाया में आता है, तो उसे आंशिक चंद्रग्रहण कहा जाता है। और जो ग्रहण पृथ्वी की हल्की छाया में होता है, उसे उपछाया चंद्रग्रहण कहा जाता है।
ग्रहण से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें
- 27 जुलाई 2018 के बाद, भारत में यह पहला मौका था जब सभी हिस्सों से ग्रहण का दृश्य देखा गया।
- एक साल में औसतन दो चंद्रग्रहण होते हैं, लेकिन कुछ सालों में तीन ग्रहण भी देखने को मिल सकते हैं।
- चंद्रग्रहण का नजारा हर 2.5 साल में किसी एक स्थान से देखा जा सकता है।
क्या आपने इस अद्भुत नजारे को देखा?
यदि आपने इस चंद्रग्रहण का संपूर्ण नजारा देखा, तो यह आपके जीवन का एक अद्भुत अनुभव होगा। यह ग्रहण न केवल खगोलशास्त्रियों, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक रहस्यमयी और रोमांचक अनुभव था। पूरी दुनिया में लाखों लोग इस नजारे के साक्षी बने और इसे अपनी आँखों से देखा।
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