Black Jaundice Symptoms: काला पीलिया (Black Jaundice) को मेडिकल भाषा में क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी से जोड़कर देखा जाता है। यह कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि जॉन्डिस (Peeleeya) का गंभीर और जानलेवा रूप है। जब लिवर में हेपेटाइटिस बी या सी वायरस का संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है और इलाज न मिलने पर यह लिवर को अंदर से बुरी तरह प्रभावित कर देता है, तब यह काले पीलिया में बदल जाता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, यह स्थिति तब बनती है जब बिलीरुबिन का स्तर बेहद खतरनाक रूप से बढ़ जाता है और शरीर में कार्बन और टॉक्सिक तत्वों की मात्रा लिवर में इकट्ठा हो जाती है। यही कारण है कि मरीज की त्वचा और आंखों का रंग हल्के पीले की बजाय गाढ़ा या काला दिखने लगता है।
कैसे होता है काला पीलिया?
सूत्रो के अनुसार, देहरादून के मैक्स अस्पताल के गैस्ट्रोलॉजी के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. मयंक गुप्ता के अनुसार,
“काला पीलिया, हेपेटाइटिस बी और सी वायरस के कारण लिवर में होने वाला खतरनाक वायरल इंफेक्शन है। यह वायरस खून के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं और लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे लिवर में कार्बन जमा हो जाती है और उसका रंग व कार्य क्षमता बदल जाती है।”
हेपेटाइटिस बी और सी क्या हैं?
1. हेपेटाइटिस बी और सी लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले वायरल इंफेक्शन हैं, जो ब्लड ट्रांसफ्यूजन, संक्रमित सुइयों, असुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित माँ से नवजात में फैल सकते हैं।
2. ये वायरस धीरे-धीरे लिवर की कोशिकाओं को खत्म करते हैं और सिरोसिस या लीवर कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
3. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2022 में हेपेटाइटिस बी और सी से करीब 13 लाख (1.3 मिलियन) लोगों की मौत हुई थी, यानी हर 30 सेकंड में एक व्यक्ति इस बीमारी से दम तोड़ रहा था।

काले पीलिया के लक्षण…
काले पीलिया के लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे उभरते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी गंभीर होती है, इसके लक्षण भी अधिक खतरनाक हो जाते हैं:
1. आंखों और नाखूनों का रंग गहरा पीला या काला होना।
2. त्वचा का रंग सामान्य पीले से गहरा या काला दिखना।
3. गाढ़े रंग का यूरिन।
4. लगातार बुखार रहना।
5. अत्यधिक थकान और शरीर में कमजोरी।
6. जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द।
7. उल्टी और डायरिया।
8. पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द।
9. भूख न लगना और वजन कम होना।
10. स्किन पर खुजली या रैशेस।
ब्लैक जॉन्डिस का खतरा कितना गंभीर?
1. लिवर सिकुड़ने और डैमेज होने का खतरा: हेपेटाइटिस बी और सी वायरस अगर लिवर में लंबे समय तक रहते हैं, तो लिवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस या फुल लिवर फेल्योर तक की स्थिति बन सकती है।
2. लीवर कैंसर: कार्बन और टॉक्सिक मेटीरियल लिवर में जमा हो जाने से कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
3. किडनी फेल्योर: समय पर इलाज न हो तो किडनी भी खराब हो सकती है।
4. त्वचा रोग और मानसिक भ्रम: शरीर में टॉक्सिन्स के बढ़ने से दिमाग पर असर पड़ सकता है जिससे भ्रम, चक्कर और कोमा जैसी स्थिति भी आ सकती है।

बचाव कैसे करें?
रक्त जांच जरूर करवाएं…
खून चढ़वाने से पहले या खून दान लेने से पहले हेपेटाइटिस बी और सी वायरस की जांच करवा लेना जरूरी है।
टीकाकरण (Vaccination)
1. हेपेटाइटिस बी का टीका जरूर लगवाएं। यह संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
2. गर्भवती महिलाओं को यह वैक्सीन जरूर लेनी चाहिए ताकि नवजात को संक्रमण न हो।
संक्रमित सुइयों और ब्लेड से बचें…
1. दाढ़ी बनवाते समय नया ब्लेड इस्तेमाल कराएं।
2. मेडिकल प्रक्रियाओं में एक ही इंजेक्शन या सुई का पुनः प्रयोग न किया जाए।
सुरक्षित यौन संबंध बनाएं…
काले पीलिया से बचने के लिए कंडोम का प्रयोग करें और पार्टनर की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी रखें।
शराब और ड्रग्स से दूरी बनाएं…
शराब और नशीले पदार्थ लिवर को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं। यदि पहले से हेपेटाइटिस है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इलाज क्या है?
ब्लैक जॉन्डिस का इलाज वायरस के आधार पर किया जाता है। इसके लिए लिवर स्पेशलिस्ट की देखरेख में एंटी-वायरल दवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा:
1. रोगी को प्रोटीन-रिच डाइट और पर्याप्त तरल पदार्थ दिए जाते हैं।
2. लिवर की कार्यक्षमता का समय-समय पर मूल्यांकन होता है।
3. जरूरत पड़ने पर लिवर ट्रांसप्लांट तक की सिफारिश की जा सकती है।
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