BJP घर-घर ढूंढेगी फर्जी वोटर, 2027 से पहले उठाया बड़ा कदम!

नाम था वोटर लिस्ट में… लेकिन वोट देने गए तो नाम ही नहीं! ऐसी शिकायतें अगर आपको 2024 के लोकसभा चुनाव में सुनाई दी हों, तो अब BJP उसे दोहराना नहीं चाहती। इस बार पार्टी ने ठान लिया है 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हर मतदाता की हकीकत को परखा जाएगा। पर सवाल उठता है क्या यह सिर्फ चुनावी रणनीति है या लोकतंत्र की सफाई अभियान?
बीजेपी का SIR मिशन: मतदाता सूची की गहराई में झांकने की कोशिश
SIR यानी Special Intensive Revision एक ऐसा अभियान जिसमें बूथ स्तर पर BJP कार्यकर्ता खुद मतदाता सूची लेकर लोगों के घर पहुंचेंगे। साल 2003 और 2024 की वोटर लिस्ट को मिलाया जाएगा, ताकि ये देखा जा सके:
- कहीं एक व्यक्ति का नाम दो जगह तो नहीं?
- कहीं कोई मृत व्यक्ति अब भी लिस्ट में तो नहीं?
- कहीं घुसपैठियों के नाम तो नहीं जुड़ गए?
ये बातें सुनने में भले ही तकनीकी लगें, लेकिन असर सीधा पड़ता है आपकी वोट की ताकत पर।
2024 का सबक नाम था, वोट नहीं डाल सके
पार्टी के सूत्र बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में लाखों BJP समर्थकों का नाम लिस्ट से गायब था। कई बुजुर्ग वोट देने पहुंचे, लेकिन मायूस लौटे।
“मैंने तो हर बार वोट दिया बेटा, पर इस बार नाम ही नहीं था…” ये दर्द झेल चुके मतदाता अब BJP की प्राथमिकता हैं।
इसलिए 2027 में ऐसा दोबारा न हो, इसीलिए ये SIR प्लान लाया जा रहा है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एक भी वोटर दो जगह न हो, लेकिन एक भी समर्थक छूटे भी नहीं।
क्या वाकई सिर्फ BJP का मिशन है?
नहीं। असल में, चुनाव आयोग खुद भी 2026 में SIR कराने की तैयारी में है। लेकिन BJP उससे पहले एक पैरेलल वेरिफिकेशन शुरू कर रही है, ताकि वक़्त रहते फर्जी नाम हटें और असली वोटर जुड़ें।

हालांकि, विपक्षी पार्टियों को इस पर शक है। समाजवादी पार्टी ने साफ कहा है अगर ये लोकतंत्र नहीं, ‘जुगाड़तंत्र’ बना, तो सड़क पर उतरेंगे। कांग्रेस भी यह जांच रही है कि कहीं किसी एक विचारधारा के वोटर्स को निशाना तो नहीं बनाया जा रहा।
क्या ये राजनीतिक चाल?
BJP का दावा है कि यह महज़ चुनावी रणनीति नहीं, वोटर अधिकारों की रक्षा है। पर सच ये भी है कि हर राजनीतिक दल इस लिस्ट पर नजर रख रहा है क्योंकि वोटर लिस्ट में एक नाम का फर्क, विधानसभा की सीट का फैसला कर सकता है।
तो जब अगली बार कोई आपके दरवाज़े पर वोटर लिस्ट लेकर पहुंचे, तो ज़रा ध्यान दीजिए आपका नाम सही है या नहीं? क्योंकि लोकतंत्र में आपका नाम ही आपकी आवाज़ है।
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