भाजपा ने बिहार, बंगाल और तमिलनाडु के लिए दमदार चेहरे मैदान में उतारे
bjp election prabhari 2025 का साल राजनीति के लिहाज से बेहद अहम होने वाला है। भाजपा ने आज साफ संकेत दे दिया है कि वो कोई कसर नहीं छोड़ने वाली। तीन बड़े राज्यों – बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के लिए चुनावी प्रभारियों की घोषणा करके पार्टी ने अपनी रणनीति की पहली परत खोल दी है।
यह सिर्फ नामों की घोषणा नहीं, बल्कि राजनीतिक चालों की बुनियाद है। आइए समझते हैं क्या है इन चेहरों के पीछे की कहानी और क्या इशारा कर रही है भाजपा की रणनीति।
बिहार: धर्मेंद्र प्रधान को मिली कमान
बिहार में चुनाव नजदीक हैं – अक्टूबर-नवंबर 2025 में यहां विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा और JDU की गठबंधन सरकार है, लेकिन अंदरखाने में खींचतान भी साफ नजर आती है। धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री और ओडिशा के बड़े नेता माने जाते हैं। उन्हें बिहार की जिम्मेदारी देना भाजपा के लिए दो संदेश हैं
- एक, वे नीतीश कुमार के साथ तालमेल बैठाने में माहिर हैं।
- दूसरा, वह जमीन पर संगठन मजबूत करने वाले नेता हैं।
उनके साथ केशव प्रसाद मौर्य (उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता) और सीआर पाटिल (गुजरात बीजेपी अध्यक्ष) को सह प्रभारी बनाना बताता है कि पार्टी हर जातीय और प्रादेशिक समीकरण को साधना चाहती है।
पश्चिम बंगाल: भूपेंद्र यादव के हाथों ‘मिशन ममता’
बंगाल में भाजपा के लिए राह आसान नहीं। 2021 में जोरदार लड़ाई के बाद भी ममता बनर्जी की TMC सत्ता में बनी रही। लेकिन भाजपा ने हार नहीं मानी। अब कमान दी गई है भूपेंद्र यादव को वे शांत रणनीति के मास्टरमाइंड हैं। 2019 और 2024 के आम चुनावों में उनके प्रबंधन कौशल ने भाजपा को कई जीतें दिलाईं। उनके साथ बिप्लब कुमार देब, पूर्व त्रिपुरा सीएम, को सह प्रभारी बनाया गया है – ये स्पष्ट संकेत है कि भाजपा बंगाल में पूर्वोत्तर मॉडल को लागू करना चाहती है।
तमिलनाडु: बैजयंत पांडा की अगुवाई में BJP की दक्षिणी चुनौती
तमिलनाडु में बीजेपी अभी भी हाशिए की पार्टी है, जहां DMK और AIADMK की राजनीति हावी रही है। बैजयंत पांडा, ओडिशा से सांसद रहे, और पार्टी के उपाध्यक्ष हैं। उनकी छवि एक मॉडर्न, सॉफ्ट स्पोकन और प्रोफेशनल नेता की है, जो दक्षिण भारत की भाषा और संस्कृति को समझने की कोशिश में लगे हैं।मुरलीधर मोहोल, पुणे के पूर्व मेयर, को सह प्रभारी बनाया गया है – एक प्रशासनिक और सांगठनिक संतुलन बनाने की कोशिश।
भाजपा की रणनीति: एक नजर में समझिए
| राज्य | प्रभारी | सह प्रभारी | प्रमुख विरोधी | चुनाव कब? |
|---|---|---|---|---|
| बिहार | धर्मेंद्र प्रधान | केशव मौर्य, सीआर पाटिल | JDU (नीतीश कुमार) | अक्टूबर-नवंबर 2025 |
| बंगाल | भूपेंद्र यादव | बिप्लब देब | TMC (ममता बनर्जी) | मार्च-मई 2026 |
| तमिलनाडु | बैजयंत पांडा | मुरलीधर मोहोल | DMK (स्टालिन) | मार्च-मई 2026 |
क्या संकेत दे रही है भाजपा?
भाजपा अब सिर्फ उत्तर भारत की पार्टी नहीं रहना चाहती। बंगाल और तमिलनाडु में लंबी लड़ाई के लिए तैयार हो चुकी है। बिहार में गठबंधन राजनीति को सहेजते हुए भाजपा अपने दम पर सीटें बढ़ाना चाहती है। अनुभवी और बहुभाषी नेताओं को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने जातीय और प्रादेशिक समीकरण साधने की कोशिश की है। भाजपा 2026 के चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर चुकी है, ताकि वो विरोधियों को चौंका सके।

