भाजपा की भोपाल जिला कार्यकारिणी की घोषणा संगठन के लिए उलटी पड़ गई। सूची सामने आते ही पार्टी के भीतर विरोध के सुर तेज हो गए और मामला सीधे मंत्रियों-विधायकों तक पहुंच गया। हालात ऐसे बने कि देर रात जारी की गई कार्यकारिणी को वापस लेना पड़ा, अब नई सूची पर मंथन शुरू हो गया है।
सूची आते ही खुला असंतोष
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति द्वारा भोपाल जिला कार्यकारिणी की घोषणा की गई थी। कुल 37 पदाधिकारियों की सूची जैसे ही मीडिया में आई, वैसे ही पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई। सूत्रों के मुताबिक, कई प्रभावशाली नेताओं के समर्थकों को कार्यकारिणी में जगह नहीं मिलने से नाराजगी फैल गई। यही वजह रही कि आपत्तियां सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि मंत्री, विधायक और सांसदों ने भी सीधे नेतृत्व से अपनी असहमति जता दी।
देर रात रद्द करनी पड़ी सूची
विरोध बढ़ने के बाद संगठन स्तर पर आनन-फानन में मंथन शुरू हुआ। लगातार फोन कॉल और फीडबैक के बीच आखिरकार देर रात जिला कार्यकारिणी की सूची को निरस्त करने का फैसला लिया गया. पार्टी के भीतर इसे संगठनात्मक चूक मानते हुए नुकसान को संभालने की कोशिश की गई, ताकि मामला और न बढ़े।
अब नए सिरे से होगी घोषणा
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब भोपाल जिला कार्यकारिणी की घोषणा दोबारा की जाएगी, इस बार संतुलन साधने पर खास ध्यान रहेगा। सभी बड़े नेताओं और गुटों को साथ लेकर चलने की रणनीति बनाई जा रही है. आगामी चुनावी तैयारियों को देखते हुए भाजपा किसी भी तरह का आंतरिक असंतोष नहीं चाहती, यही वजह है कि सूची को जल्दबाजी में थोपने के बजाय दोबारा विचार किया जाएगा।
संगठन की सियासत फिर सामने
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भाजपा में जिला स्तर की नियुक्तियां अब सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं रहीं। यहां हर नाम के पीछे राजनीतिक समीकरण, संतुलन और संदेश छिपा होता है. अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि नई सूची कब आती है और क्या वह संगठन के भीतर उठे असंतोष को शांत कर पाती है या नहीं।
