प्रोजेक्ट मैनेजर को इसी रास्ते से यात्रा कर पेश होने का आदेश
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (Bilaspur-Raipur Highway) की बदहाल हालत पर नाराजगी जताते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया है. लगातार दायर किए जा रहे हलफनामों को ‘उद्देश्य की पूर्ति में विफल’ करार देते हुए हाईकोर्ट ने एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर को मंगलवार 5 अगस्त को स्वयं पेश होने का निर्देश दिया है.
बिलासपुर-रायपुर हाईवे की बदहाली पर हाईकोर्ट नाराज
मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की पीठ ने कहा कि अब केवल कागजी जवाब नहीं, जमीनी हकीकत जरूरी है. कोर्ट ने हाईवे पर मलबा, गंदगी और लावारिस निर्माण सामग्री पर भी नाराजगी जताई और NHAI के अधिवक्ता वानखेड़े से तीखे सवाल पूछे.
‘लापरवाही नहीं, वास्तविक सुधार जरूरी’-HC
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब हर सुनवाई पर संबंधित अधिकारी को इसी रास्ते से बुलाया जाएगा. अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी. बेंच ने कहा कि अब लापरवाही नहीं, वास्तविक सुधार जरूरी है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘राष्ट्रीय राजमार्गों पर गंदगी, मलबा और निर्माण सामग्री पड़ी हुई है. लोग और जानवर अपनी जान गंवा रहे हैं. NHAI इस स्थिति पर ध्यान देने में विफल रहा है.’
बेंच से NHAI ने पूछे ये सवाल
कोर्ट ने कहा कि अब केवल औपचारिक हलफनामों से काम नहीं चलेगा. जब तक संबंधित अधिकारी स्वयं सड़क की दुर्दशा का अनुभव नहीं करेंगे, तब तक सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती. सुनवाई के दौरान एनएचएआई के अधिवक्ता वानखेड़े से मुख्य न्यायाधीश ने तीखे सवाल पूछते हुए कहा, ‘मिस्टर वानखेड़े, आप तो रोज रायपुर जाते होंगे, क्या आपने इस हाईवे की हालत देखी है? सड़क पर जो स्टॉपर्स और मटेरियल मेंटेनेंस के नाम पर फेंके जाते हैं, वो लावारिस हालत में बिखरे रहते हैं. क्या आप चाहते हैं कि पब्लिक उन्हें उड़ाते चले?’कोर्ट ने यह भी कहा कि पेंचवर्क के नाम पर जो मटेरियल सड़क पर डाला जाता है, उससे गंदगी फैल रही है और हर समय दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है.
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