Bijapur Naxalite attack villagers : बीजापुर जिले में एक बार फिर नक्सलियों ने हिंसा का तांडव मचाया है, जिसमें दो ग्रामीणों की हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
दिल दहला देने वाली घटना
बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र के नेलाकांकेर गांव में बीती रात नक्सलियों ने दो ग्रामीणों—रवि कट्टम और तिरूपति सोढी की धारदार हथियार से हत्या कर दी। सूत्रों के अनुसार, नक्सली देर रात गांव में पहुंचे और दोनों को घर से बाहर बुलाकर हमला किया। हत्या के समय नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी का शक जताया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
दहशत का साया
इस घटना के बाद पूरा क्षेत्र भय और दहशत की गिरफ्त में आ गया है। ग्रामीणों में डर का माहौल है, कई लोगों ने इसे नक्सलियों की आतंक फैलाने की साजिश बताया। पहले भी क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं सामने आती रही हैं, जहां पुलिस मुखबिरी के संदेह में निर्दोष ग्रामीणों को निशाना बनाया गया।
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पुलिस की कार्रवाई
वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और आसपास के क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से गांव और आस-पास के इलाकों में मजबूत पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
Bijapur Naxalite attack villagers : ग्रामीणों की चिंता
नक्सलियों ने हत्या के बाद गांव में पर्चे भी छोड़े हैं, जिनमें पुलिस के सहयोग को रोकने और सुरक्षा बलों से दूरी बनाए रखने की धमकी दी गई है। इस प्रकार के पत्र अक्सर दहशत फैलाने और ग्रामीणों को आतंकित करने के लिए छोड़े जाते हैं।
प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी
बीजापुर और बस्तर के अन्य जगहों में नक्सली घटनाएं लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। सरकार पर लगातार दबाव है कि ऐसे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ग्रामीणों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए संवाद और पुनर्वास कार्यक्रम चलाए जाएं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं नक्सली हिंसा को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस और सामूहिक प्रयास हों।
बीजापुर में दो निर्दोष ग्रामीणों की हत्या ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि नक्सली हिंसा से लड़ने के लिए प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और आम लोगों का मिलकर मुकाबला करना जरूरी है। जब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास और संवाद की दीर्घकालिक नीति नहीं बनेगी, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।
