bihar voter list revision sc hearing 10 july: राहुल गांधी भी रहेंगे शामिल
bihar voter list revision sc hearing 10 july: बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर राजनीतिक और कानूनी उठापटक तेज होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की है। इसी बीच 9 जुलाई को प्रस्तावित बिहार बंद में देशभर में चर्चित चेहरा राहुल गांधी भी शामिल होंगे।
चुनाव आयोग का SIR आदेश और सुप्रीम कोर्ट में याचिका
गैर-सरकारी संस्था ADR ने 5 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके मांग की कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का चुनाव आयोग का आदेश रद्द किया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 325, 326 और Representation of People Act 1950 समेत Registration of Electoral Rolls Rules 1960 के नियम 21A का उल्लंघन है।
विरोध के सुर तीखे
कांग्रेस, RJD, वामपंथी दल और INDIA गठबंधन ने SIR को पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया पर संदेहस्पद बताया है। आरजेडी के तेजस्वी यादव ने कहा कि यह “पक्षपाती और सरकारी NRC” जैसा बन सकता है। पार्टी ने विरोध स्वरूप 9 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने भी स्पष्ट किया कि इस बंद में राहुल गांधी आने वाले हैं और इसे दलित, वंचित और अल्पसंख्यक विरोधी साजिश बताया गया है। वहीं, पप्पू यादव ने इसे “मतदाता सूची से वर्ग विशेष को बाहर करने की रणनीति” बताया।
चुनाव आयोग का पक्ष “कोई वैध वोटर बाहर नहीं”
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सत्यापन प्रक्रिया संविधान और Representation of People Act 1950 के तहत की जा रही है। वैध मतदाता का नाम हटाया नहीं जाएगा, बल्कि विदेशी घुसपैठियों या अन्य गड़बड़ी में नाम जुड़वा देने वालों की जाँच होगी।
26 जून को पटना में चुनाव आयोग की 9 सदस्यीय टीम ने बैठक कर इसी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। आयोग ने कहा कि यह प्रक्रिया सभी राज्यों में समय-समय पर लागू होती है।
विशेष संशोधन (SIR) क्या है?
SIR के अंतर्गत वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने की विशेष गहिराई से समीक्षा होती है। इसे संक्षेप या विस्तृत रूप में किया जा सकता है। बिहार में आखिरी बार यह प्रक्रिया 2003 में हुई थी।
24 जून को आयोग ने निर्देश दिया कि 1 जनवरी 2003 के बाद वोटर लिस्ट में शामिल हुए सभी मतदाता व्यक्तिगत गणना फॉर्म भरें। 1987 के बाद जन्मे मतदाताओं को जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या शैक्षणिक दस्तावेज एप्लिकेशन के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा।
फॉर्म और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया
- फॉर्म भरना व दस्तावेज़ सौंपना:
- निवासी और बाहर रहने वाले मतदाता दोनों को विभाग की वेबसाइट से ECI फ़ॉर्म डाउनलोड कर 26 जुलाई तक भरना होगा।
- साथ में जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या स्कूल प्रमाण पत्र भी लगाना जरूरी होगा।
- डॉक्यूमेंट अपलोड:
- फॉर्म भरकर हस्ताक्षर के बाद ऑनलाइन अपलोड करना होगा।
- अनुपालन न करने पर:
- यदि व्यक्ति फॉर्म नहीं भरता या दस्तावेज अपलोड नहीं करता, तो उसका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाएगा।
विपक्ष क्यों कर रहा SIR का विरोध?
विपक्ष के सामने गंभीर शंकाएँ मुख्यतः छह तरह की हैं:
- दस्तावेजों का अभाव: जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता की जानकारी और जाति प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज ग्रामीण और गरीब परिवारों के पास नहीं होते।
- नगरवासी और प्रवासी कामगारों की पिटाई: दस्तावेज इकट्ठा करना उन लोगों के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है जो राज्य से बाहर रहते हैं।
- समय का संकट: चुनाव के ठीक पहले जून अंत में घोषणा और मात्र एक महीने में प्रक्रिया पूरा करने से तोड़फोड़ पर प्रश्न उठ रहे हैं।
- भारी संख्या में वोटों का संभावित नुकसान: अनुमान है कि 2 करोड़ से अधिक मतदाता ट्रैवेलिंग, दस्तावेजों के अभाव आदि कारणों से सूची से बाहर हो सकते हैं।
- चुनाव प्रक्रिया में बाधा: बाढ़ प्रभावित इलाकों या बाहरी लोगों के वोटर नाम कटने की संभावना से खतरा है।
- न्यायिक चुनौती असंभव: चुनावी अवधि में कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती, इसलिए प्रक्रिया समाप्त हो सकती है बिना रोक के।
बिहार की मतदाता सूची का SIR विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में जा पहुंचा है। 10 जुलाई को सुनवाई के बाद स्पष्टता मिलेगी कि चुनाव आयोग का निर्णय वैध है या नहीं। इससे पहले 9 जुलाई को बिहार बंद में राहुल गांधी की उपस्थिति इसे और ऊँचा राजनीतिक प्रारूप देगी। दोनों ही घटनाओं का असर बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल और मतदाताओं पर पड़ेगा।
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