बिहार में यादव वोट भी BJP की तरफ झुके
bihar election results: बिहार विधानसभा चुनाव में एक दिलचस्प तस्वीर उभरकर सामने आई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. डॉ. मोहन यादव का बिहार में हुआ प्रचार कई सीटों पर माहौल बदलने वाला कारक बन गया। यादव समाज से आने वाले नेता के तौर पर उनका प्रभाव साफ दिखाई दिया और नतीजों में यह बात सामने भी आई।

डॉ. मोहन यादव ने चुनाव अभियान के दौरान बिहार के लगभग 26 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया था। इनमें से 21 सीटों पर एनडीए (BJP–JDU एवं सहयोगी दल) ने जीत दर्ज की या निर्णायक बढ़त कायम की। यह संख्या यादव मतदाताओं के रुझान में आए बदलाव का संकेत है।
किन सीटों पर दिखा डॉ. मोहन यादव का असर?
नीचे वे प्रमुख क्षेत्र हैं, जहां उनके प्रचार के बाद परिणाम एनडीए के पक्ष में गए
• बगहा — NDA (BJP)
• सहरसा — NDA (JDU)
• सिकटा — NDA (BJP)
• फुलपरास — NDA (JDU, शीला मंडल)
• फतुहा — NDA आगे
• बेलहर — NDA (BJP)
• बिस्फी — NDA (JDU/BJP)
• वजीरगंज — NDA (BJP/JDU)
• बोधगया — NDA आगे
• मधुबनी/बिस्फी — NDA
• पिपरा — NDA (BJP)
• मनेर — NDA बढ़त
• कटोरिया — NDA (JDU)
• बांका — NDA (BJP)
• नाथनगर — NDA
• दीघा घाट — NDA (BJP)
• ढाका — NDA (BJP)
• चिरैया — NDA
• नरकटिया — NDA
• मोतिहारी — NDA (BJP)
इन सभी जगहों पर प्रचार के दौरान यादव समुदाय के बड़े समूहों ने खुले तौर पर कहा था कि वे “मुख्यमंत्री यादव की अपील को नजरअंदाज नहीं करेंगे।” चुनाव के बाद जो नई वोटिंग प्रवृत्ति सामने आई, उससे यही संकेत मिलता है कि इस बार यादव वोट का हिस्सा पहली बार बड़े पैमाने पर बीजेपी के खाते में गया।

यादव वोट बैंक में सेंधः NDA के लिए गेमचेंजर
बिहार में यादव वोट पर पारंपरिक रूप से महागठबंधन का कब्जा माना जाता था। लेकिन इस चुनाव में समीकरण कुछ अलग दिखे। डॉ. मोहन यादव ने सभा दर सभा यादव समाज को सीधे संबोधित किया। उनके भाषणों में न तो बहुत बड़ी राजनीतिक भाषा थी और न आक्रामकता लेकिन एक अपनापन था, जिसने भीड़ को खींचा। कई गांवों में यह चर्चा आम थी कि “अपना आदमी आया है, बात तो सुननी चाहिए।” चुनाव बाद विश्लेषण, में यही बात वोटिंग पैटर्न में भी दर्ज हुई।
26 में से 21 सीटेंः यह आंकड़ा क्यों मायने रखता है?
इसका असर इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि कई सीटें ऐसी थीं जहां मुकाबला बेहद करीबी था। यहीं डॉ. मोहन यादव का दौरा निर्णायक फैक्टर साबित हुआ। फतुहा, मनेर, नाथनगर और बोधगया जैसे क्षेत्र परंपरागत रूप से कठिन माने जाते थे, लेकिन इस बार माहौल बदला हुआ दिखा।बीजेपी रणनीतिकारों का दावा है कि “यादव समाज का 10–12% भी इधर शिफ्ट हुआ, तो उसका सीधा फायदा मिला।”

बिहार की राजनीति में नया मोड़
नतीजों ने जो तस्वीर पेश की है, वह अगले विधानसभा चुनावों और लोकसभा रणनीति दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। डॉ. मोहन यादव का बिहार दौरा बीजेपी नेतृत्व के लिए सफल प्रयोग साबित हुआ है। यह भी तय हो गया कि अगर किसी प्रदेश का नेता अपनी जातीय पहचान और सादगी से जनता के करीब जाए, तो सीमाएं मायने नहीं रखतीं। बिहार की इस जीत में कई चेहरे अहम थे, लेकिन 26 सीटों के आंकड़े ने डॉ. मोहन यादव का नाम सुर्खियों में ला दिया है।
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