बिहार चुनाव 2025 एग्जिट पोल: एनडीए को स्पष्ट बहुमत, महागठबंधन पिछड़ता दिखा
17 एजेंसियों के सर्वे में NDA सरकार

बिहार चुनाव 2025 एग्जिट पोल: बिहार की सियासत में आज सबसे चर्चित खबर आई 17 एजेंसियों के एग्जिट पोल ने साफ कर दिया है कि राज्य में एक बार फिर एनडीए की लहर देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, एनडीए को 145 से 160 सीटों के बीच मिल सकती हैं, जो कि स्पष्ट बहुमत का संकेत है। वहीं, महागठबंधन को इस बार बड़ा झटका लग सकता है। सर्वे बताता है कि महागठबंधन को 73 से 91 सीटें ही मिलती दिख रही हैं। जबकि अन्य दलों के खाते में 5 से 10 सीटें जाने की संभावना जताई गई है।
एनडीए फिर आगे, बीजेपी-जेडीयू का बैलेंस बरकरार
पोल के अनुसार, बीजेपी को 72 से 82 सीटें, जबकि जेडीयू को 59 से 68 सीटें मिलने का अनुमान है। लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) को 4-5 सीटें और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को भी 5 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी और जेडीयू के गठजोड़ ने राज्य में एक बार फिर मजबूत पकड़ बनाई है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में एनडीए के उम्मीदवारों को जनता का भरोसा मिला है।
महागठबंधन के लिए मुश्किल दौर
महागठबंधन को लेकर इस सर्वे के आंकड़े उतने उत्साहजनक नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राजद (RJD) को 51 से 63 सीटें, कांग्रेस को 12 से 15 सीटें, सीपीआई(एमएल) को 6 से 9 सीटें, सीपीआई को 2 सीटें, और सीपीएम को 1 सीट मिलने का अनुमान है।वहीं, वीआईपी और आईआईपी जैसे छोटे दलों को लगभग शून्य से एक सीट तक का नुकसान झेलना पड़ सकता है। यह स्पष्ट संकेत है कि तेजस्वी यादव की पार्टी राजद भले ही सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनी रहे, लेकिन बहुमत से दूर रहेगी।
वोटरों का मूड: विकास बनाम वादे
सर्वे में यह भी सामने आया कि बिहार के वोटर इस बार स्थिर सरकार और विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिपोर्ट में करीब 60% लोगों ने कहा कि वे “काम करने वाली सरकार” को वोट देंगे, जबकि 30% मतदाताओं ने बेरोजगारी और महंगाई को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बताया। इसके बावजूद, एनडीए की “स्थिरता की छवि” ने जनता को प्रभावित किया है।
बिहार चुनाव 2025 एग्जिट पोल: विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार के एग्जिट पोल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए की पकड़ अब भी मजबूत है। राजनीति विशेषज्ञ अजय मिश्र के अनुसार, “बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को जनता ने स्थिरता का विकल्प माना है, जबकि महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी ने नुकसान पहुंचाया है।”
क्या नतीजे भी ऐसा ही बोलेंगे?
हालांकि, एग्जिट पोल हमेशा अंतिम नतीजों की तस्वीर नहीं बताते। पिछले चुनावों में भी बिहार में कई बार एग्जिट पोल और वास्तविक नतीजों में फर्क देखा गया है। फिर भी इस बार के आंकड़े एनडीए के लिए राहत और महागठबंधन के लिए चिंता का सबब हैं।
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Shital Sharma
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