Naxalite surrender in MP: मध्य प्रदेश के बालाघाट में 7 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने 10 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया. मध्य प्रदेश में “पुनर्वास से पुनर्जीवन” के तहत नक्सलियों का यह कोई साधारण सरेंडर नहीं था, क्योंकि इनमें से कई कैडर KB और MMC ज़ोन में वर्षों तक खूनी वारदातों का हिस्सा रहे हैं.
सरेंडर करने वाले ये नक्सली कितने खतरनाक थे, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये IED ब्लास्ट, पुलिस पर फायरिंग, ग्रामीणों में दहशत फैलाने, जंगल रूट्स को नियंत्रित करने और ऑपरेशनल टीमों पर हमलों जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं. उनका नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ था
Naxalite surrender in MP: इन नक्सलियों ने किया सरेंडर
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में सुरेंद्र उर्फ कबीर, यह एसजेडसी का सचिव था। राकेश ओडी उर्फ मनीष, जरिना उर्फ जोगी मुसाक, नवीन नुप्पो उर्फ हिडमा, सलीता उर्फ सावित्री, जयशीला उर्फ ललीता अयोम, शिल्पा नुप्पो, समर उर्फ समारू, लालसिंह मरावी उर्फ सींगा और विक्रम उर्फ हिडमा वट्टी है। सभी आरोपी करीब एक से दो दशक से नक्सली संगठन से जुड़े हुए थे।
Naxalite surrender in MP: CM ने नक्सलियों को संविधान की कॉपी दी
हथियार डालने के बाद सीएम मोहन यादव ने सभी नक्सलियों को संविधान की कॉपी दिए हैं। उन्होंने बाकी नक्सलियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमारे जवानों ने कई बड़े नक्सलियों के ढेर भी किया है। साथ ही उन्होंने इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की शहादत को भी याद किया है। साथ ही कहा कि हमसे जो मैदान में लड़ेगा, हम उसका खत्मा करेंगे।
नक्सलियों ने डाले हथियार
अब ज़मीनी कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति के दबाव में, सभी नक्सलियों ने AK-47, INSAS, SLR और BGL जैसे हथियारों सहित अपना गोला-बारूद मुख्यमंत्री के सामने जमीन पर रखकर मुख्यधारा में वापसी का निर्णय लिया. यह आत्मसमर्पण KB क्षेत्र में नक्सलियों की कमजोर होती पकड़ का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
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2 करोड़ 36 लाख के इनामी
नक्सलियों पर 2 करोड़ 36 लाख रुपए का ईनाम था। पुलिस लाईन में आयोजित कार्यक्रम में माओवादियों ने सरेंडर किया, जिसमें केबी डिवीजन के एसीएम कबीर पर 77 लाख रूपए का ईनाम था। सभी नक्सलियों पर महाराष्ट्र छत्तीसगढ और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से इनाम घोषित किया गया था। इस तरह गौर करें तो ये मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर बन गया है।
मोहन यादव ने कहा कि हथियार डालने वालों की पुनर्वास हम करेंगे। हम उनकी सारी चीजों की चिंता करेंगे। हथियार उठाकर संघर्ष करने की इच्छा रखने वालों से हम दबने वाले नहीं हैं, उन्हें हम ठिकाने लगाएंगे। उन्होंने कहा कि समय सीमा तय है कि हम 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करके रहेंगे। उन्होंने कि हमारे दबाव के कारण लोग आत्मसमर्पण कर रहे हैं। हम एमपी में नक्सलवाद को नहीं चलने देंगे।
