Bhopal- मध्य प्रदेश सरकार ने सांची दुग्ध संघ के प्रबंधन और संचालन को अगले पांच वर्षों के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को सौंपने का फैसला किया है। सरकार का यह निर्णय प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, इस फैसले के साथ कई विवाद भी खड़े हो गए हैं।
विवेक तन्खा ने जताया विरोध
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे ‘बैकडोर टेकओवर’ करार दिया है। उनका कहना है कि सांची मध्य प्रदेश का अपना ब्रांड है, ठीक उसी तरह जैसे अमूल गुजरात का है। तन्खा ने ट्विटर के माध्यम से इस फैसले की आलोचना की और इसे प्रदेश के हितों के खिलाफ बताया। उनका आरोप है कि अमूल लंबे समय से मध्य प्रदेश में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था, और अब NDDB के माध्यम से इसे अवसर दिया जा रहा है।
इस टेकओवर का विरोध पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने भी किया। उन्होंने एक बैठक में इस फैसले पर असहमति जताई, जिसके बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। बामरा के अचानक हटाए जाने से सरकार के इस फैसले पर और अधिक सवाल खड़े हो गए हैं, और इसे लेकर प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
Read More- फोन पर ज्यादा बात करने पर ससुरालियों ने की महिला की बुरी तरह पिटाई
5.5 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले के पीछे का मकसद स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। वर्तमान में मध्य प्रदेश प्रतिदिन लगभग 5.5 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन करता है, और अगले पांच वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का मानना है कि सांची का प्रबंधन NDDB को सौंपने से सांची की स्थिति में सुधार होगा और यह ब्रांड आर्थिक रूप से और मजबूत हो सकेगा। राज्य में वर्तमान में भोपाल और इंदौर स्थित सांची दुग्ध संघ ही लाभ में चल रहे हैं, जबकि अन्य संघ संघर्ष कर रहे हैं।
Read More- Terrorist Pannu Threatens : आतंकी पन्नू की अमेरिकी हिंदुओं को धमकी, PM मोदी ने कहा अमेरिका का दुश्मन
अप्रत्यक्ष रूप से फायदा
विवाद के केंद्र में अमूल का नाम भी आ रहा है। अमूल द्वारा मध्य प्रदेश में अपना विस्तार करने की कोशिशें काफी समय से चल रही थीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी। अब NDDB के टेकओवर से ऐसा प्रतीत होता है कि अमूल को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।
अंत में, यह देखना होगा कि सरकार का यह फैसला राज्य के दुग्ध उत्पादन और किसानों की स्थिति पर कैसा प्रभाव डालता है।
