भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने संसद में कहा की भाेपाल के बड़े तालाब की अपार जलराशी में एक प्राचीन नगर है। शहरी मामलों की स्थायी समिति की बैठक में शर्मा ने पानी के भीतर खाेज़-बीन कर इस धरोहर को सामने लाने की वकालत की है।
संसद भवन में हुई बैठक में सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि तालाब के किनारों पर प्राचीन दीवारों के रूप में प्राचीन नगर के अवशेष आज भी मौजूद हैं। इसको लेकर वैज्ञानिक अध्ययन और खोज कराई जानी चाहिए, जिससे भोपाल की विरासत काे दुनिया के सामने लाया जा सके।
भोपाल एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर है

सांसद आलोक शर्मा ने बताया कि भोपाल राजा-महाराजाओं की नगरी रही है। यहां 11वीं सदी की गोंड काल की धरोहरें हैं। प्राचीन काल से ही इस शहर का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। इनका संरक्षण, संवर्धन और सुंदरीकरण किया जाना चाहिए।
भाेपाल के बड़े तालाब में ऐतिहासिक धरोहर के अवशेष मौजूद हैं, जिसे लेकर कई वर्षों से अलग – अलग दावे किए जा रहे हैं। भाेपाल के लोगों के साथ ही इतिहास के जानकार भी समय-समय पर मांग उठाते रहे हैं। इसकी खोज होना बहुत जरूरी है।
शर्मा ने कहा कि कई इतिहासकाराें का कहना है की इसमें एक प्राचीन नगर बसा हुआ था। गोंड कालीन किले की दीवारें व बुर्ज भी इसके किनारे पर दिखाई देते हैं। ऐसे में इसकी वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराना जरूरी है।
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MP NEWS:पहले भी आ चुका है सर्वे का प्रस्ताव
बताया जा रहा है कि पहला भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भोपाल को बड़े तालाब में डूबे किले के अवशेषाें की तलाश के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया था।
इसमें मरीन आर्कियोलॉजी के विशेषज्ञों से पानी के भीतर सर्वे कराना था लेकिन विशेषज्ञों के अभाव में केंद्र स्तर पर इस प्रस्ताव को अनुमति नहीं मिली।
