भोपाल मेट्रो परियोजना में एक और अहम कदम जुड़ गया है. शहर में दो नई मेट्रो ट्रेनें पहुंच गई हैं, जिसके बाद भोपाल मेट्रो के बेड़े में कुल ट्रेनों की संख्या अब 10 हो गई है। ये दोनों ट्रेनें सुभाष नगर स्थित मेट्रो डिपो में लाई गई हैं और फिलहाल उनका तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है।मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि जैसे-जैसे परियोजना के अगले चरण पूरे होंगे, इन ट्रेनों को भी क्रमिक रूप से संचालन में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि ऑरेंज और ब्लू लाइन शुरू होने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव दिख सकता है.
ऑरेंज और ब्लू लाइन से बढ़ेगी शहर की रफ्तार
भोपाल मेट्रो परियोजना के तहत फिलहाल ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन के विस्तार पर तेज काम चल रहा है।प्रबंधन का लक्ष्य है कि ऑरेंज लाइन का कमर्शियल संचालन शुरू किया जाए और ब्लू लाइन को भी तय समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाया जाए। जब ये दोनों लाइनें पूरी तरह चालू हो जाएंगी, तब शहर के ज्यादा हिस्सों में मेट्रो सेवा पहुंच सकेगी.इससे न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि शहर की आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियां भी तेज होने की उम्मीद है।
वडोदरा प्लांट में बन रही हैं 27 ट्रेनें
भोपाल मेट्रो के लिए कुल 27 मेट्रो ट्रेनें वडोदरा के प्लांट में तैयार की जा रही हैं.इनमें से अब तक 10 ट्रेनें भोपाल पहुंच चुकी हैं। बाकी 17 ट्रेनें आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से शहर लाई जाएंगी।मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक सुभाष नगर डिपो में ट्रेनों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है, इसलिए भविष्य में जब और ट्रेनें आएंगी तब भी संचालन व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी.
अत्याधुनिक तकनीक से लैस होंगे कोच
भोपाल मेट्रो की ट्रेनें आधुनिक तकनीक से लैस बनाई जा रही हैं। फिलहाल तीन कोच वाले ट्रेन सेट तैयार किए गए हैं, लेकिन भविष्य में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इन्हें छह कोच तक बढ़ाया जा सकता है.इन ट्रेनों में ड्राइवरलेस तकनीक और एटीपी (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन) सिस्टम जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी, जिससे संचालन ज्यादा सुरक्षित और कुशल बनाया जा सकेगा.
अभी दो ट्रेनें ट्रैक पर, बाकी डिपो में
मेट्रो परियोजना के तहत वर्ष 2023 में आठ ट्रेनें पहले ही भोपाल पहुंच चुकी थीं। अब दो नई ट्रेनें आने के बाद कुल संख्या 10 हो गई है.हालांकि फिलहाल सिर्फ दो ट्रेनें ही ट्रैक पर संचालित हो रही हैं, जबकि बाकी ट्रेनें सुभाष नगर डिपो में खड़ी हैं।मेट्रो प्रबंधन के अनुसार किसी भी ट्रेन को सेवा में शामिल करने से पहले उसका विस्तृत तकनीकी परीक्षण किया जाता है. यही वजह है कि सभी ट्रेनें तुरंत संचालन में नहीं लाई जातीं.आने वाले महीनों में जैसे-जैसे परियोजना के नए चरण पूरे होंगे, इन ट्रेनों को भी ट्रैक पर उतारा जाएगा और भोपाल में मेट्रो नेटवर्क का दायरा तेजी से बढ़ता दिखाई दे सकता है.
