मध्यप्रदेश के धार में स्थित भोजशाला को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. जिसमें फैसला लिया गया है. बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में मां वाग्देवी (सरस्वती) की दोपहर 12 बजे तक पूजा होगी और फिर नवाज अता की जाएगी. मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमा नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है. वहीं, सरस्वती पूजा को भी निर्धारित समय और अनुशासन के साथ कराने की बात कही गई है. कोर्ट ने प्रशासन को साफ निर्देश दिए हैं कि भोजशाला परिसर में बैरिकेडिंग की जाए और दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग सुनिश्चित किए जाएं, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बने. अदालत का कहना है कि प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि पूरे आयोजन के दौरान शांति, कानून-व्यवस्था और आपसी सौहार्द बना रहे.सुनवाई के बाद प्रशासन ने जिले में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे पूरा शहर हाई अलर्ट पर है।
8000 सुरक्षाकर्मी, शहर छावनी में तब्दील
भोजशाला परिसर और धार शहर में करीब 8000 से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल लगाया गया है, जबकि प्रमुख चौराहों, प्रवेश मार्गों और धार्मिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
सीसीटीवी से पल-पल की निगरानी
शहर और भोजशाला परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। कंट्रोल रूम से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना पर तुरंत कार्रवाई हो सके। अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
300 मीटर तक नो-फ्लाइंग जोन घोषित
सुरक्षा कारणों से भोजशाला के चारों ओर 300 मीटर के दायरे को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में ड्रोन या किसी भी प्रकार की हवाई गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। प्रशासन का कहना है कि बसंत पंचमी के दिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
