bhimbetka: विश्व धरोहर सूची में शामिल भीमबैठका के शैलचित्रों को अब एक नए अंदाज़ में सहेजने की तैयारी है। मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड यहां 19 करोड़ रुपए की लागत से रॉक आर्ट इको पार्क म्यूजियम विकसित करेगा, जहां प्रागैतिहासिक काल की यह अनमोल विरासत सुरक्षित भी रहेगी और आम लोगों के लिए ज्यादा सहज तरीके से देखी भी जा सकेगी। भीमबैठका परिक्षेत्र में बनने वाला यह संग्रहालय 1.12 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। उद्देश्य साफ है, जंगलों में फैले दूरस्थ शैलचित्रों को एक ही स्थान पर लाकर संरक्षण और प्रदर्शन दोनों को मजबूत करना।
bhimbetka: 10 किलोमीटर में एक जगह दिखेगा इतिहास
भीमबैठका क्षेत्र में शैलचित्रों के कई संकुल करीब 10 किलोमीटर के दायरे में फैले हैं। सात पहाड़ियों पर बसे इस इलाके में 750 से ज्यादा शैलाश्रय मौजूद हैं, जिन तक पहुंचना हर पर्यटक के लिए आसान नहीं होता। नए रॉक आर्ट इको पार्क म्यूजियम में जावरा, विनायका, भोंरावली और लाखा जुआर जैसे दुर्गम क्लस्टरों में मौजूद दुर्लभ और कम देखे गए शैलचित्रों की हूबहू प्रतिकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी।
bhimbetka: प्रकृति से जुड़ा इको पार्क
पर्यटन बोर्ड के योजना निदेशक प्रशांत बघेल के मुताबिक यह संग्रहालय पारंपरिक कंक्रीट भवन की तरह नहीं होगा। यहां अस्थायी और पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग कर इको पार्क विकसित किया जाएगा, ताकि भीमबैठका के प्राकृतिक परिवेश से कोई टकराव न हो. उन्होंने बताया कि डिजाइन ऐसा होगा, जिससे पर्यटकों को गुफाओं और शैलाश्रयों जैसा वास्तविक और जीवंत अनुभव मिल सके। यानी इतिहास सिर्फ देखा नहीं जाएगा, महसूस भी किया जा सकेगा।
देशभर के चुनिंदा शैलचित्र भी होंगे शामिल
इस संग्रहालय में सिर्फ भीमबैठका ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में पाए गए चुनिंदा शैलचित्रों को भी विस्तृत जानकारी के साथ प्रदर्शित करने की योजना है। डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रागैतिहासिक जीवन, कला और संस्कृति को समझाने पर भी खास जोर रहेगा।
2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
पर्यटन विभाग की ओर से बताया गया है कि परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर काम चल रहा है। वैश्विक स्तर पर भीमबैठका की पहचान को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से इस म्यूजियम को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया भी जारी है। अब देखने वाली बात होगी कि यह इको पार्क किस तरह से इतिहास और आधुनिक तकनीक के बीच सेतु बनता है।
