
गौहत्या के खिलाफ सख्त कदम
देवरिया गाँव के हिंदू समुदाय ने इस घटना के बाद एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद की। समुदाय ने भंवड़ पुलिस को एक याचिका सौंपी, जिसमें माँग की गई कि गौहत्यारों को सार्वजनिक रूप से दंडित किया जाए। विशेष रूप से, गौभक्तों ने अनुरोध किया कि आरोपियों की बारात निकाली जाए ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए कि गौहत्या जैसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे। इस याचिका को समुदाय के व्यापक समर्थन के साथ पुलिस के सामने प्रस्तुत किया गया, जिसने मामले की गंभीरता को और उजागर किया।
cow slaughter parade Deoria: पुलिस की त्वरित कार्रवाई
भंवड़ पुलिस ने इस याचिका और स्थानीय लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लिया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और कब्रिस्तान के पास छिपे चार गौहत्यारों को पकड़ लिया। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि ये आरोपी गौवंश की तस्करी और हत्या में लिप्त थे। पुलिस ने इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 की धारा 3, 5, और 8 के तहत मामला दर्ज किया। इसके अतिरिक्त, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 के तहत भी कार्रवाई की गई। पुलिस की इस त्वरित प्रतिक्रिया ने स्थानीय लोगों में विश्वास जगाया।

गौहत्यारों की निकाली बारात
हिंदू समुदाय की माँग को ध्यान में रखते हुए, भंवड़ पुलिस ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया। चारों आरोपियों को गाँव में सार्वजनिक रूप से बारात के रूप में घुमाया गया। इस अनोखे दंड का उद्देश्य न केवल अपराधियों को शर्मिंदगी का एहसास कराना था, बल्कि समाज को यह संदेश देना भी था कि गौहत्या जैसे अपराधों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी। इस कार्रवाई के दौरान गाँव के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए और पुलिस के इस कदम की सराहना की। यह घटना न केवल कानूनी कार्रवाई का हिस्सा थी, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक एकता का प्रतीक भी बनी।
cow slaughter parade Deoria: गौरक्षा पर बना कानून
गौवंश की रक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त कानूनों, जैसे कि गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020, ने पुलिस को और सशक्त किया है। इस अध्यादेश के तहत गौहत्या के लिए 7 से 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
घनश्यामसिंह वाढेर की रिपोर्ट
