
दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही एक नई टैक्सी दौड़ती नजर आएगी—नाम है ‘भारत टैक्सी’। लेकिन ये सिर्फ एक और कैब नहीं है। ये एक आंदोलन है। एक बदलाव है। एक मौका है उन ड्राइवरों के लिए जो अब तक निजी कंपनियों के कमीशन मॉडल में फंसे हुए थे।
भारत टैक्सी: एक नई शुरुआत
सरकार ने पहली बार एक ऐसा राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है जिसमें ड्राइवर सिर्फ कर्मचारी नहीं, सह-मालिक हैं। सहकारिता मंत्रालय और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन ने मिलकर इसे तैयार किया है। नवंबर से दिल्ली में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है, जिसमें 650 ड्राइवर शामिल होंगे।
ड्राइवर की कमाई, अब पूरी उसकी
ओला-उबर जैसी कंपनियाँ हर राइड पर 20-25% तक कमीशन काटती हैं। भारत टैक्सी में ऐसा नहीं होगा। हर राइड की 100% कमाई सीधे ड्राइवर को मिलेगी। बस एक मामूली सदस्यता शुल्क देना होगा—दैनिक, साप्ताहिक या मासिक।
महिला ड्राइवर्स को मिलेगा सम्मान और सुरक्षा
पहले चरण में 100 महिला ‘सारथी’ जुड़ेंगी। इन्हें मुफ्त प्रशिक्षण, बीमा और विशेष सुरक्षा सुविधाएँ दी जाएंगी। 2030 तक इनकी संख्या 15 हजार तक पहुँचाने का लक्ष्य है। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम है।
सुरक्षा और पारदर्शिता में भी आगे
भारत टैक्सी ऐप में पुलिस थानों से सीधा इंटीग्रेशन होगा। डिस्ट्रेस बटन जैसी सुविधाएँ होंगी जो यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी। किराया भी स्थिर और पारदर्शी रहेगा—डायनामिक प्राइसिंग का झंझट नहीं।
ग्रामीण भारत की ओर बढ़ता कदम
जहाँ ओला-उबर शहरी बाजारों तक सीमित हैं, भारत टैक्सी का फोकस ग्रामीण विस्तार पर है। 2028-2030 तक यह सेवा देश के जिला मुख्यालयों और गाँवों तक पहुँचेगी, एक लाख ड्राइवरों के साथ।
क्या यह वाकई गेमचेंजर है?
अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो भारत टैक्सी सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि एक नई सोच बन सकती है। एक ऐसा मॉडल जिसमें मुनाफा, सम्मान और सुरक्षा—तीनों ड्राइवर के हिस्से में आते हैं।
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