भारत में यमराज का मंदिर : भारत में तो वैसे देवी – देवताओं के हजारों मंदिर है, लेकिन क्या आपने कभी यमराज के मंदिर के बारें सुना हैं, अगर सुना तो आज हम आपको भारत में यमराज के प्रसिद्ध मंदिर के बारें में बताएंगे। जो कि हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भरमौर क्षेत्र में स्थित है।
जो अपनी चमत्कारिक घटनाओं के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में यमराज विराजमान है, यह मंदिर घर की तरह दिखाई देता है। लेकिन इसके अंदर कोई नहीं जाता सभी लोग बाहर से ही प्रणाम करके निकल जाते है।
भारत में यमराज का मंदिर: क्या है मान्यता?
कहा जाता है यह वही जगह है, जहां यमराज सबके कर्मों का लेखा – जोखा करते हैं। मान्यता है कि – मृत्यु के बाद आत्मा को यमदूत इसी स्थान पर लेकर आते है। जहां कर्मों के आधार पर उनकी सजा का निर्णय लिया जाता है।

भारत में यमराज का मंदिर: इस मंदिर में है चित्रगुप्त का कमरा
मंदिर में एक कमरा चित्रगुप्त का है, जिसे चित्रगुप्त का कक्ष कहते है। यहां किसी प्रकार की कोई प्रतिमा नहीं है, फिर भी इसे सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
मान्यता है कि, इसी कक्ष में यमदूत आत्मा को यहां लाकर उसके कर्मों की पूरी कहानी सुनाते है। और फिर अच्छे – बुरे कर्मों का लेखा- जोखा करते हैं।
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यमराज की अदालत में होता है न्याय
चित्रगुप्त कक्ष के सामने ही एक और कक्ष है, जिसे यमराज की अदालत कहा जाता है। यह अदालत रहस्यमयी तरीके से काम करती है। यहां के जज और वकील दोनों यमराज होते हैं, जो आत्मा के कर्मों के आधार पर तय करते हैं, कि उसे नर्क में स्थान देना है, या स्वर्ग में।
अंदर जाने से क्यों कतराते हैं लोग?
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर के भीतर जाना, अपने जीवन के कर्मों का विशलेषण करवाने जैसा है। इसलिए वे मंदिर के सामने सिर झुकाकर, बाहर से ही श्रद्धा प्रकट करते हैं। उन्हें डर लगता है कि कहीं उनके कर्म उन्हें कटघरे में खड़ा न कर दें। मंदिर के प्रति एक रहस्यमयी श्रद्धा और भय का भाव बना हुआ है।

कर्मों के अनुसार आत्मा का मार्ग
स्थानीय निवासी बताते हैं कि, मंदिर के चारों दिशाओं में चार विशेष द्वार हैं – स्वर्ण, रजत (चांदी), ताम्र (तांबा), और लौह (लोहा)। मान्यता है कि-
1. स्वर्ण द्वार से उन्हीं आत्माओं को ले जाया जाता है जिन्होंने पुण्य किए हों
2. लौह द्वार से उन आत्माओं को नर्क भेजा जाता है जिन्होंने पाप किए हों
3. बाकी द्वारों से आत्मा की अन्य योग्यताओं के अनुसार रास्ता तय होता है
गरुड़ पुराण में भी इन चार द्वारों का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी धार्मिक मान्यता और मजबूत होती है।
मृत्यु के बाद आत्मा की पहली मंजिल?
लोककथाओं के अनुसार, जब किसी की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी आत्मा को सीधे धरमराज मंदिर में लाया जाता है, जहां चित्रगुप्त और यमराज के सामने उसका कर्म परीक्षण होता है। यह जगह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि मान्यता के अनुसार आत्मा की पहली न्यायिक मंजिल मानी जाती है।
