bhagavad gita natyashastra unesco : पीएम मोदी बोले- यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण
bhagavad gita natyashastra unesco : यूनेस्को ने 17 अप्रैल 2025 को भगवद गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल किया है। यह रजिस्टर विश्वभर की उन दस्तावेजी विरासतों को संरक्षित करता है जो मानव सभ्यता के लिए अनमोल हैं।
इस वर्ष 74 नई प्रविष्टियाँ जोड़ी गईं, जिससे अब इस सूची में कुल 570 दस्तावेजी विरासतें शामिल हो चुकी हैं।
A proud moment for every Indian across the world!
The inclusion of the Gita and Natyashastra in UNESCO’s Memory of the World Register is a global recognition of our timeless wisdom and rich culture.
The Gita and Natyashastra have nurtured civilisation, and consciousness for… https://t.co/ZPutb5heUT
— Narendra Modi (@narendramodi) April 18, 2025
पीएम मोदी बोले- “हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“भगवद गीता और नाट्यशास्त्र का यूनेस्को वर्ल्ड मेमोरी रजिस्टर में शामिल होना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। यह हमारी अमूल्य बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक सम्मान है।”
🏛️ क्या है यूनेस्को का मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर?
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यह रजिस्टर 1992 में शुरू किया गया था।
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इसका उद्देश्य विश्व की दस्तावेजी धरोहरों को संरक्षित करना और उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।
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इसमें शामिल होने का मतलब है कि उस रचना को संयुक्त राष्ट्र स्तर पर अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता मिलती है।
🎭 क्या है नाट्यशास्त्र?
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भरत मुनि द्वारा रचित नाट्यशास्त्र को भारतीय नाट्य और प्रदर्शन कला का आधार माना जाता है।
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यह ग्रंथ नाट्य, संगीत, नृत्य और अभिनय के सिद्धांतों की पहली और सबसे प्राचीन व्यवस्थित रूप से लिखी गई पांडुलिपि है।
📖 भगवद गीता का महत्व
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भगवद गीता, महाभारत का एक हिस्सा है और इसे श्रीमद्भगवद्गीता भी कहा जाता है।
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यह ग्रंथ जीवन, धर्म, कर्म और मोक्ष के बारे में गहन दार्शनिक ज्ञान प्रदान करता है।
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दुनियाभर में इसे आध्यात्मिक प्रेरणा और जीवन-दर्शन के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखा जाता है।
🗣️ संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने क्या कहा?
संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इसे “भारत की सभ्यतागत विरासत के लिए ऐतिहासिक क्षण” बताया और कहा:
“ये कालातीत रचनाएं सिर्फ साहित्यिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत के विचार, अनुभूति और अभिव्यक्ति की नींव हैं। यह हमारी बुद्धिमत्ता और कलात्मकता का वैश्विक उत्सव है।”
📸 अब तक 14 भारतीय शिलालेख शामिल
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इस नई उपलब्धि के साथ भारत के कुल 14 दस्तावेज अब यूनेस्को की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हो चुके हैं।
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मंत्री शेखावत ने इन ग्रंथों की दुर्लभ तस्वीरें भी साझा कीं, जो अब ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित की जाएंगी।
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