गणपति स्थापना का शास्त्रीय महत्व
Bhadrapada Ganesh Chaturthi significance: गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाने का विधान स्कंद पुराण, मुद्गल पुराण और गणेश पुराण में विस्तार से वर्णित है। गणेश पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने इसी दिन अनिलमंडल हल्दी-चंदन से बने शरीर से भगवान गणेश का सृजन किया। इसलिए भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणपति का प्रथम प्राकट्य माना जाता है।
स्कंद पुराण में विघ्ननाशक गणेश की पूजा
स्कंद पुराण में उल्लेख है कि भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को विघ्ननायक की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। इस दिन गणपति की आराधना करने से पूरे वर्ष के विघ्न और बाधाएं दूर हो जाती हैं… इसलिए यह तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है।
मुद्गल पुराण के अनुसार पूजा का श्रेष्ठ समय
मुद्गल पुराण बताता है कि भाद्रपद मास का यह समय सूर्य की गति उत्तर से दक्षिण की ओर होते हुए दक्षिणायन काल में आता है। यह ऋषि-मुनियों के लिए तप और साधना का श्रेष्ठ समय माना गया है। वर्षा ऋतु के अंत और शरद ऋतु की शुरुआत में वातावरण पवित्र और ऊर्जा से परिपूर्ण होता है, जो पूजा-अर्चना को प्रभावशाली बनाता है।
गणपति स्थापना से अनंत चतुर्दशी तक का पर्व
भाद्रपद मास की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक गणपति स्थापना और विसर्जन का पर्व चलता है। यह केवल भक्ति का उत्सव नहीं, बल्कि शास्त्रीय और पुराण सम्मत परंपरा है, जो विघ्नहर्ता भगवान गणेश के आशीर्वाद का वचन देती है।
इस वर्ष की तिथियां और शुभ मुहूर्त
Bhadrapada Ganesh Chaturthi significance: इस वर्ष गणेश चतुर्थी 27 अगस्त 2025, बुधवार को है, जिसका शुभ मुहूर्त प्रातः 11:07 से दोपहर 1:33 बजे तक रहेगा। वहीं, गणेश विसर्जन 6 सितंबर, शनिवार को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस दिन भक्त गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के साथ उनका स्वागत और विदाई करते हैं।
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