Bhadrakali Temple CG: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के हृदय स्थल बाजार पारा में स्थित माता भद्रकाली का मंदिर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत केंद्र है। नगर की कुलदेवी के रूप में पूजनीय मां भद्रकाली का यह मंदिर नवरात्र के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष श्रद्धालुओं से भरा रहता है। अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह मंदिर जिले की धार्मिक पहचान बन चुका है।
भैरव बाबा के स्थान पर प्रकट हुईं मां भद्रकाली…
स्थानीय मान्यता के अनुसार, जहां आज यह दिव्य मंदिर स्थित है, वहां पहले भैरव बाबा का मंदिर हुआ करता था। कहा जाता है कि नगर के श्रद्धालु लेखराज शर्मा को एक रात मां भद्रकाली ने सपने में दर्शन दिए और अपने अस्तित्व का संकेत दिया।
सपने के अनुसार, श्रद्धालुओं ने उस स्थान से देवी की प्रतिमा लाकर स्थापित की और वहां भद्रकाली मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यह स्थान “मां भद्रकाली की धरा” कहलाने लगा।

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक — सौहार्द का संदेश देता मंदिर…
बाजार पारा क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य इलाका है, जहां मंदिर के ठीक सामने एक मस्जिद भी स्थित है। यह दृश्य धार्मिक एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। बताया जाता है कि पहले मंदिर टापू पर स्थित था, जिसे 1980 में नगरवासियों ने भव्य स्वरूप दिया।
मंदिर के शीर्ष पर कैलाश पर्वत का दिव्य स्वरूप बना हुआ है, जहां भगवान शिव, माता पार्वती और उनका परिवार विराजमान हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर में गंगा तालाब और हनुमान जी का मंदिर भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र हैं।

भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी…
मंदिर के मुख्य पुजारी राजू पांडे के अनुसार —
“यह मंदिर बेमेतरा का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां हर दिन सैकड़ों भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। मां भद्रकाली हर सच्चे भक्त की प्रार्थना अवश्य सुनती हैं।”

70 साल पुराना मंदिर, लगातार हो रहा विस्तार…
मंदिर संस्था के वरिष्ठ सदस्य राजकुमार ठाकुर बताते हैं —
“यह मंदिर लगभग 70 वर्ष पुराना है। नगरवासियों के सहयोग से इसका निर्माण और विस्तार लगातार होता रहा है।”
वहीं मंदिर समिति के अध्यक्ष उत्तमचंद माहेश्वरी ने कहा —
“वर्तमान में मंदिर परिसर के विस्तार का कार्य जारी है। जल्द ही यहां शिव मंदिर और पार्वती मंदिर का भी निर्माण पूरा किया जाएगा, जिससे यह स्थल और अधिक दिव्य व भव्य रूप लेगा।”

भक्ति, आस्था और एकता का संगम…
बेमेतरा का भद्रकाली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और एकता का प्रतीक है। यहां आने वाला हर भक्त यह महसूस करता है कि जहां सच्ची श्रद्धा होती है, वहां मां भद्रकाली हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।

