Betul Forest Destruction: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में वनों का तेजी से सफाया हो रहा है, और इस विनाश में रेलवे ठेकेदारों के साथ-साथ वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जिले के मरामझिरी क्षेत्र में तीसरी रेल लाइन के निर्माण के नाम पर जंगलों को बेरहमी से नष्ट किया जा रहा है। ठेकेदारों द्वारा जेसीबी मशीनों से जंगल में रास्ते खोदे जा रहे हैं, दर्जनों डंपरों की आवाजाही से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। सागौन की बेशकीमती लकड़ियों को काटकर सड़कों के किनारे छोड़ दिया गया है, जो ठेकेदारों के हवाले हैं। इस लापरवाही के चलते सागौन की चोरी के मामले भी बढ़ रहे हैं।
वन माफियाओं को संरक्षण
बैतूल वन मंडल के जंगल बर्बादी की कगार पर हैं, और इसका सबसे बड़ा कारण वन विभाग के मुख्य संरक्षक (सीसीएफ) का ठेकेदारों और माफियाओं को संरक्षण देना बताया जा रहा है। मरामझिरी के जंगलों में ठेकेदारों ने न केवल पेड़ काटे, बल्कि अवैध रूप से मुरम और गिट्टी डंप कर रखी है। जेसीबी से बनाए गए रास्ते भविष्य में माफियाओं के लिए सागौन की तस्करी को आसान बना सकते हैं। इस मामले में जब सीसीएफ से सवाल किया गया, तो उन्होंने जांच का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और मीडिया को लिखित शिकायत करने की सलाह दे डाली। डीएफओ के छुट्टी पर होने के कारण भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
Betul Forest Destruction: ठेकेदारों की मनमानी
यह स्थिति न केवल वन संपदा के लिए खतरा है, बल्कि आम जनता को भी ग्लोबल वार्मिंग का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बैतूल में इस समय तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, और यदि वनों का विनाश इसी तरह जारी रहा, तो भविष्य में 50 डिग्री से अधिक गर्मी झेलने की नौबत आ सकती है। जंगल नष्ट होने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिसका असर स्थानीय समुदायों पर पड़ रहा है। फिर भी, जिम्मेदार अधिकारी ठेकेदारों के साथ मिलकर वनों को बेचने में लगे हैं।
वन प्रेमियों ने की कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वन विभाग के उच्च अधिकारी ही माफियाओं को संरक्षण देंगे, तो जंगलों को बचाना असंभव हो जाएगा। अब सभी की नजरें मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) पर टिकी हैं, जो इस मामले में जांच और कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं। सवाल यह है कि क्या दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।
अवैध रूप से हो रही वनों की कटाई
बैतूल के जंगलों को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। प्रशासन को चाहिए कि वह अवैध निर्माण और वन कटाई पर रोक लगाए, साथ ही दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करे। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा।
शशांक सोनकपुरिया की रिपोर्ट
