Benefits of betel leaf: भारत में पान का पत्ता सिर्फ स्वाद के लिए ही बस नहीं खाते हैं, बल्कि यह एक औषधीय पौधा भी माना जाता है। पूजा-पाठ से लेकर सामाजिक आयोजनों तक, पान का पत्ते का उपयोग हर अवसर पर करते है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके सेहत से जुड़े फायदे भी हैं और कुछ गंभीर नुकसान भी?
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आइए जानते हैं पान के पत्ते के फायदे और नुकसान..
पाचन में सहायक…
पान का पत्ता चबाने से लार का स्त्राव बढ़ता है, जिससे पाचन एंजाइम्स एक्टिव होते हैं। खाना खाने के बाद पान खाना एक पारंपरिक आदत रही है, जिससे खाना जल्दी पचता है और गैस-एसिडिटी नहीं होती।

मुंह की दुर्गंध और बैक्टीरिया से राहत…
पान में एंटीसेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह मुंह की दुर्गंध दूर करने में मदद करता है और दांतों व मसूड़ों की बीमारियों से बचाता है।
वजन घटाने में सहायक…
कुछ आयुर्वेदिक रिसर्च में माना गया है कि पान के पत्ते मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं। इससे शरीर की चर्बी घटाने में मदद मिलती है।
ब्लड शुगर कंट्रोल…
पान की पत्तियों में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की शुगर लेवल को बैलेंस करने में सहायक हो सकते हैं। डायबिटीज मरीजों के लिए ये फायदेमंद हो सकता है (बिना सुपारी या तंबाकू मिलाए)।
सांस की बीमारी में राहत…
पान का पत्ता श्वसन तंत्र को खोलने में सहायक होता है। सर्दी, जुकाम या खांसी में गुनगुने पानी में उबाल कर इसका सेवन करने से आराम मिल सकता है।
जख्म भरने में कारगर…
पान में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो त्वचा के घाव भरने में मदद करते हैं। पारंपरिक चिकित्सा में पान की पत्तियों को चोट या जलने पर बांधने की विधि प्रचलित रही है।

पान के पत्ते के नुकसान…
सुपारी और तंबाकू के साथ सेवन खतरनाक…
अधिकतर लोग पान के साथ तंबाकू और सुपारी का सेवन करते हैं, जिससे कैंसर, विशेषकर मुंह और गले का कैंसर होने का खतरा बढ़ता है। यही इसकी सबसे बड़ी हानि है।
हाई बीपी वालों के लिए हानिकारक…
कुछ रिसर्च में माना गया है कि पान के पत्ते ब्लड प्रेशर को असंतुलित कर सकते हैं, खासकर अगर इसके साथ सुपारी या तंबाकू लिया जाए। हाई बीपी मरीजों को परहेज करना चाहिए।
दांतों और मसूड़ों पर असर…
पान में मौजूद कुछ रसायन दांतों को पीला करने के साथ-साथ मसूड़ों की सेहत को भी प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक लगातार सेवन से दांतों में सड़न हो सकती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदेह…
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पान खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि इससे हार्मोनल असंतुलन हो सकता है।
आयुर्वेद में पान का उल्लेख…
आयुर्वेद में पान को “ताम्बुल” कहा गया है और इसे वात-कफ नाशक माना गया है। चरक संहिता में इसका वर्णन पाचन सुधारक और मुखशुद्धि के रूप में किया गया है। लेकिन इसमें यह भी कहा गया है कि इसे सीमित मात्रा में और संयम से ही लेना चाहिए।

पान कैसे खाएं कि नुकसान न हो?
1. बिना तंबाकू और सुपारी के खाएं।
2. खाली पत्ता या लौंग, इलायची के साथ सेवन करें।
3. खाने के तुरंत बाद न खाएं – 15–20 मिनट बाद लें।
4. रोजाना सेवन से बचें, सप्ताह में 2–3 बार पर्याप्त है।
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