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Benefits Of Hug Therapy: तनाव, डिप्रेशन और हाई BP का इलाज बन सकता है गले लगाना!

Hema Gupta July 10, 2025

Benefits Of Hug Therapy: जब हम परेशान होते हैं, दुखी होते हैं या थके हुए होते हैं, तो एक अपनेपन भरा गले लगना कितना सुकून देता है – यह अनुभव शायद हम सबने कभी न कभी महसूस किया होगा। लेकिन क्या वाकई गले लगाना (hugging) तनाव (stress) को कम कर सकता है? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह भी है या यह सिर्फ भावनात्मक सहारा भर है?

आइए जानते हैं गले लगाने से होने वाले मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक लाभ, इससे जुड़ी रिसर्च और क्यों यह हमारी मानव प्रकृति का अहम हिस्सा है।

गले लगाना – सिर्फ भावनात्मक इशारा नहीं, बल्कि एक थेरेपी..

गले लगाना इंसान की सबसे प्राकृतिक भावनात्मक प्रतिक्रियाओं में से एक है। यह सेफ्टी, प्यार, सहयोग, और विश्वास की भावना को दर्शाता है। जब हम किसी को गले लगाते हैं, तो केवल भावनाएं ही नहीं जुड़तीं, बल्कि शरीर के अंदर भी जैविक परिवर्तन होते हैं।

वैज्ञानिक क्या कहते हैं?

सूत्रो के अनुसार, University of North Carolina की एक स्टडी में पाया गया कि जो लोग रोजाना 20 सेकंड तक गले मिलते हैं, उनमें तनाव से जुड़े हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर कम होता है और ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) का स्तर बढ़ता है। ऑक्सीटोसिन को ‘लव हॉर्मोन’ या ‘फील गुड हॉर्मोन’ कहा जाता है, जो खुशी, विश्वास और आत्मीयता को बढ़ाता है।

मानसिक तनाव में राहत…

1. तनाव कम करता है: गले लगाने से शरीर में ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ता है, जो कोर्टिसोल को घटाता है। इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और मन शांत होता है।

2. एंग्जाइटी और डिप्रेशन में मददगार: जब कोई हमें गले लगाता है, तो हमारा नर्वस सिस्टम एक्टिवेट होता है, जिससे मानसिक दबाव कम होता है और भावनात्मक सुरक्षा का एहसास होता है।

3. अकेलेपन को करता है दूर: अकेलापन आज की दुनिया की बड़ी समस्याओं में से एक है। गले लगाने जैसा छोटा सा स्पर्श व्यक्ति को ‘belongingness’ की भावना देता है और emotional isolation को खत्म करता है।

रिश्तों में गहराई और विश्वास…

गले लगाना केवल तनाव ही नहीं घटाता, यह रिश्तों को भी मजबूत करता है। यह बताता है कि आप सामने वाले के लिए संवेदनशील और केयरिंग हैं। माता-पिता और बच्चों के बीच, दोस्तों, पार्टनर या जीवनसाथी – सभी के बीच गले लगाना भावनात्मक जुड़ाव को गहरा करता है।

जर्मनी में हुई एक रिसर्च में यह सामने आया कि जो कपल रोजाना एक-दूसरे को गले लगाते हैं, उनकी रिलेशनशिप ज्यादा मजबूत और तनावमुक्त होती है।

बच्चों के लिए क्यों जरूरी है स्पर्श?

रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के मानसिक विकास में टच यानी स्पर्श की अहम भूमिका होती है। जन्म के बाद यदि शिशु को मां का गले लगाना, छूना, सहलाना नहीं मिले तो उसके भावनात्मक और मानसिक विकास में बाधा आ सकती है। WHO और UNICEF भी कंगारू मदर केयर (Kangaroo Mother Care) जैसी तकनीकों की सिफारिश करते हैं, जिसमें शिशु को मां की छाती से लगाकर रखा जाता है ताकि वह सुरक्षित महसूस करे।

थेरेप्यूटिक हगिंग…

आज कई मनोचिकित्सक और काउंसलर “थेरेप्यूटिक हगिंग” को डिप्रेशन और एंग्जाइटी के इलाज में शामिल कर रहे हैं। इसके अंतर्गत रोगी को संवेदनशील स्पर्श से आत्मीयता और सुरक्षा का अनुभव कराया जाता है। जापान और अमेरिका में यह अब एक मान्य होलिस्टिक थेरेपी बन चुकी है।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मददगार है गले लगाना

एक शोध में यह बात सामने आई है कि अगर आप किसी को सिर्फ 20 सेकंड तक गले लगाते हैं, तो यह आपके ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकता है। यह प्रभाव खासतौर पर उन परिस्थितियों में ज्यादा प्रभावी होता है, जब आप किसी तनावपूर्ण कार्य (Stressful Task) को करने जा रहे हों। उस स्थिति में किसी करीबी को गले लगाते है तो तनाव कम करता है और हार्ट हेल्थ को बेहतर बना सकता है। यानी यह छोटा-सा स्पर्श शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने में एक प्रभावशाली उपाय हो सकता है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

1. अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, 75% लोग गले लगने के बाद खुद को तनावमुक्त महसूस करते हैं।

2. 30 सेकंड की हग 5 मिनट की मेडिटेशन जितनी प्रभावशाली साबित हो सकती है – ऐसा एक मेटा एनालिसिस में सामने आया है।

हगिंग को अपनाएं, तनाव को दूर भगाएं…

आज की भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा भरी जिंदगी में हम अपने आसपास के लोगों से भावनात्मक रूप से दूर हो गए हैं। टेक्नोलॉजी ने हमें स्क्रीन के जरिए तो जोड़ा है, लेकिन दिलों से नहीं। गले लगाना एक सरल लेकिन शक्तिशाली तरीका है जिससे हम न केवल खुद को बेहतर महसूस कर सकते हैं, बल्कि दूसरों को भी मानसिक सहारा दे सकते हैं।

About the Author

Hema Gupta

Author

"मैं हेमा गुप्ता, पिछले 2 वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं। एक क्रिएटिव और पैशनेट कंटेंट राइटर होने के साथ-साथ मैं ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी अनुभव रखती हूं। मेरा फोकस स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट, सनातन संस्कृति और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों पर रहता है। सटीकता, सरल भाषा और रोचकता मेरी लेखन शैली की खासियत है। चाहे डिजिटल प्लेटफॉर्म हो या ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग, मेरा मकसद हमेशा ऑडियंस को सही और दिलचस्प जानकारी पहुंचाना है.

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