Be Careful During Periods: भारत की करोड़ों महिलाएं हर महीने मासिक धर्म यानी पीरियड्स का सामना करती हैं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इस दौरान खुद को स्वच्छ रखना जरुरी, और समय- समय पर सैनेटरी पैड चेंज करते रहना चाहिए, अगर एक ही पैड लम्बे समय तक इस्तेमाल करते हैं, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
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Be Careful During Periods: क्यों खतरनाक है लंबे समय तक स्टेफ्री पहनना?
बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा…
जब खून लंबे समय तक पैड में जमा रहता है, तो वह बैक्टीरिया के लिए उपजाऊ जमीन बन जाता है। यह संक्रमण योनि से होते हुए गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और यहां तक कि पूरे शरीर में फैल सकता है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, “गर्मी और नमी के कारण सैनेटरी नैपकिन बैक्टीरिया के लिए एक परफेक्ट वातावरण बनाते हैं। लंबे समय तक उसे न बदलना यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, यीस्ट इंफेक्शन, और वजाइनल इरिटेशन का कारण बन सकता है।”
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम…
यह एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा स्थिति है। टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम तब होता है जब शरीर में कुछ विशेष बैक्टीरिया अत्यधिक विषाक्त तत्व छोड़ते हैं। यह आमतौर पर तभी होता है जब लंबे समय तक एक पैड का प्रयोग करते है। इसलिए सावधान रहें और खुद का ख्याल रखें।
त्वचा पर चकत्ते और एलर्जी..
लंबे समय तक एक ही नैपकिन के उपयोग से स्किन रैशेज, जलन और एलर्जी होना आम बात है। खासकर गर्मियों में जब पसीना अधिक आता है, तब यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
दुर्गंध और सामाजिक असहजता..
पुराने सैनेटरी नैपकिन से बदबूं आने लगती है, जिससे आसपास के लोग असहज हो सकते हैं। यह महिला के आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है, खासकर स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों में इसलिए सेनेटरी पैड हर 5-6 घंटे में बदलते रहना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक समस्या…
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2021 के अनुसार, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लगभग 25% महिलाएं सुरक्षित मासिक धर्म उत्पादों तक पहुंच से वंचित हैं। कई तो अब भी कपड़े का ही इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में जब उन्हें स्टेफ्री जैसी सुविधा मिलती भी है, तो वह उसका अधिकतम उपयोग करने की कोशिश करती हैं – चाहे वह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक ही क्यों न हो। यह जागरुक न होने का कारण हैं।

Be Careful During Periods: कैंसे बच या बचा सकते है, इन समस्याओं से…
जागरूकता अभियान के जरिए..
स्वास्थ्य मंत्रालय, स्कूलों और स्थानीय पंचायतों को मिलकर जागरूकता फैलानी होगी कि सैनेटरी नैपकिन को हर 4 से 6 घंटे में बदलना क्यों जरूरी है। इसके लिए गांवों में कार्यशालाएं, नुक्कड़ नाटक और मोबाइल हेल्थ वैन के जरिए जागरुकता फैला सकते हैं।
सस्ती और टिकाऊ उत्पादों का उपयोग…
री-यूजेबल क्लॉथ पैड्स और मेंस्ट्रुअल कप जैसे विकल्प भी महिलाओं को उपलब्ध कराए जाने चाहिए जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर हैं और लंबी अवधि तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
स्कूलों और कार्यस्थलों में सुविधाएं…
महिलाओं और किशोरियों को अपने पीरियड्स के दौरान बार-बार नैपकिन बदलने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान चाहिए। शौचालयों में डिस्पोजल मशीन, वेंडिंग मशीन और पानी की उपलब्धता जरूरी है।
विशेषज्ञों की राय…
विशेषज्ञों का कहना है कि एक सैनेटरी नैपकिन को अधिकतम 4 से 6 घंटे तक ही इस्तेमाल करना सुरक्षित होता है, इसके बाद उसे बदलना बेहद जरूरी हो जाता है, चाहे वह पूरी तरह भरा हो या नहीं। परंतु जागरूकता की कमी और कई बार लापरवाही के चलते महिलाएं एक ही पैड को 8 से 12 घंटे या उससे भी अधिक समय तक इस्तेमाल करती हैं। यह आदत छोटी लग सकती है, लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

सावधानियां…
1. हर 4–6 घंटे में पैड ज़रूर बदलें।
2. अधिक ब्लीडिंग हो तो 2–3 घंटे में नैपकिन बदलें।
3. हमेशा हाथ धोकर ही पैड लगाएं और हटाएं।
4. यूज किए गए पैड को अच्छी तरह लपेट कर कचरे में फेंकें।
5. यदि वजाइनल खुजली, जलन, बदबू या बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष
मासिक धर्म एक जैविक प्रक्रिया है, जिसे शर्म नहीं बल्कि समझ और सावधानी के साथ अपनाने की जरूरत है। एक स्टेफ्री या कोई भी सैनेटरी नैपकिन कितनी भी अच्छी क्वालिटी का क्यों न हो, उसे लंबे समय तक इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है। महिलाओं और किशोरियों को समय पर इसे बदलने और सफाई रखने की आदत डालनी होगी – यह केवल व्यक्तिगत स्वच्छता नहीं, बल्कि एक स्वस्थ समाज की दिशा में कदम है। और इसके बारें में सबको पता होना चाहिए।
