bastar ghar wapsi: बस्तर में एक बार फिर यह साफ दिखा कि छल, प्रपंच और दिखावटी आडंबर ज्यादा दिन टिक नहीं पाते। आखिरकार इंसान अपनी जड़ों की ओर लौट ही आता है। बस्तर जिले की नानगुर तहसील के ग्राम साड़गुड़ में बीते 15 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहा एक ही परिवार, अब स्वेच्छा से सनातन धर्म में वापस लौट आया है। गांव और क्षेत्र के वरिष्ठजनों की मौजूदगी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ परिवार के 13 सदस्यों ने अपने मूल धर्म को फिरअपनाया।
bastar ghar wapsi: पूर्वजों की आस्था ने बदला मन
ग्राम साड़गुड़ निवासी बघेल परिवार के सदस्य लखेश्वर, शांति, रामचरण, प्रभुदास, सनमती, नीलकुमारी, कौशल्या, साहिल, शुभम, प्रतीक, हर्षिता, आनंद और अनन्या ने अपने पूर्वजों की परंपराओं को अपनाते हुए सनातन धर्म में आस्था व्यक्त की.परिवार के सदस्यों ने साफ शब्दों में कहा कि यह निर्णय उन्होंने किसी दबाव, डर या प्रलोभन के बिना, पूरी तरह अपनी इच्छा से लिया है। उनका कहना था कि समय के साथ उन्हें अपनी मूल संस्कृति, रीति-रिवाज और पूर्वजों की आस्था का महत्व समझ में आया, और वही उन्हें वापस सनातन धर्म की ओर खींच लाई।
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bastar ghar wapsi: समाज से जुड़ाव ही असली पहचान
कार्यक्रम में मौजूद समाज प्रमुखों ने कहा कि समाज के साथ रहकर, सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी ही किसी व्यक्ति और परिवार की मजबूत पहचान बनाती है। समाज से कटकर या उसके खिलाफ जाकर की गई गतिविधियां न तो व्यक्ति के हित में होती हैं, न समाज के.सनातन धर्म में लौटे परिवार के सदस्यों का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया। उनके कानों में फूल खोंसे गए, माथे पर तिलक लगाया गया और शुभकामनाएं दी गईं।
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बस्तर में दिख रही धार्मिक पुनर्जागरण की लहर
बस्तर के आदिवासी अंचलों में धर्मांतरण लंबे समय से एक गंभीर सामाजिक मुद्दा रहा है. चाहे वह स्वेच्छा से हो या बहकावे और प्रलोभन के चलते, इसे सांस्कृतिक पहचान पर चोट के रूप में देखा जाता रहा है.हालांकि अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। बस्तर में धार्मिक पुनर्जागरण की लहर साफ दिखाई देने लगी है। जो लोग कभी अपनी जड़ों से दूर चले गए थे, अब वही अपनी विरासत, संस्कृति और परंपराओं की ओर लौट रहे हैं।
