ज़मीन के नीचे आग दहक रही है: क्या है इसका रहस्य?

सोचिए, जब धरती की गहराई से अचानक आग और धुआं उठने लगे, तो कैसा लगेगा? कुछ ऐसा ही हुआ है हिंद महासागर के शांत नीले पानी के बीच मौजूद उस निर्जन टुकड़े पर, जिसे हम बैरन आइलैंड कहते हैं भारत का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी।
13 और 20 सितंबर 2025 को, आठ दिनों के भीतर दो बार यह ‘सोता हुआ दैत्य’ हल्की दहाड़ के साथ फट पड़ा। हालांकि इस बार विस्फोट ज़्यादा तीव्र नहीं था, लेकिन ये घटनाएं एक बार फिर हमें याद दिलाती हैं कि हमारी धरती अंदर से कितनी ज़िंदा और अशांत है।
बैरन आइलैंड: सिर्फ एक द्वीप नहीं, बल्कि आग की कहानी
बैरन आइलैंड अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का हिस्सा है और पोर्ट ब्लेयर से लगभग 138 किलोमीटर दूर स्थित है। ये छोटा सा द्वीप, जो लगभग 3 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, पूरी तरह निर्जन है। यहाँ कोई बस्ती नहीं, कोई गाड़ी नहीं, कोई सड़क नहीं सिर्फ राख, पत्थर, और आग की गंध।
यह दक्षिण एशिया का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी है और भारत का भी अकेला। इसकी ऊंचाई करीब 354 मीटर है। इस जगह पर हरियाली बहुत कम है, बस थोड़ी बहुत झाड़ियां और घास जैसी वनस्पति। लेकिन इस वीराने में भी, विज्ञान और रोमांच की एक दुनिया बसती है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक? यह फूटता क्यों है बार-बार?
धरती की सतह के नीचे मैग्मा होता है एक पिघला हुआ, गरम और द्रव रूप का पदार्थ। जब ये मैग्मा बहुत अधिक दबाव में आ जाता है, तो वो सतह को तोड़कर बाहर निकलता है। यही होता है ज्वालामुखी विस्फोट।
बैरन आइलैंड का ज्वालामुखी पहली बार 1787 में फटा था। तब से अब तक यह कई बार फट चुका है 2017, 2018, 2022, जुलाई 2025, और अब फिर सितंबर 2025 में इसकी गतिविधियां दर्ज की गईं।
हर बार का विस्फोट अलग होता है। कुछ बार यह इतना हल्का होता है कि सिर्फ धुआं उठता है, और कुछ बार यह इतना तीव्र होता है कि राख और लावा कई किलोमीटर तक हवा में फैल जाते हैं।
क्या है खतरा? और क्यों यह द्वीप खास है?
फिलहाल किसी इंसानी जीवन को खतरा नहीं है क्योंकि बैरन आइलैंड पर कोई नहीं रहता। लेकिन वैज्ञानिक इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। यह ज्वालामुखी, समुद्र के अंदर हो रहे टेक्टॉनिक मूवमेंट्स और पृथ्वी की भूगर्भीय गतिविधियों का संकेत देता है।

यह जगह सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर ट्रैवलर्स के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। कई ट्रैवल कंपनियां बैरन आइलैंड के आस-पास स्कूबा डाइविंग और बोट राइड की सुविधा देती हैं जहां लोग दूर से ज्वालामुखी को देख सकते हैं।
बैरन आइलैंड: ‘अनदेखी जानकारी’
यह जगह हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के पास आज भी ऐसे रहस्य हैं जिन्हें हमने पूरी तरह समझा नहीं है। ज्वालामुखी, भूकंप और टेक्टॉनिक प्लेट्स ये सब हमारी पृथ्वी के ‘इमोशन्स’ की तरह हैं, जो समय-समय पर प्रकट होते हैं। बैरन आइलैंड एक ‘लिविंग लेबोरेटरी’ है, जहां धरती का दिल धड़कता है, जहां इंसान नहीं बसते, पर इतिहास हर बार लिखा जाता है।
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