गैंगस्टर का यूपी पुलिस को खुला चैलेंज– क्या होगा अगला कदम?

बरेली, उत्तर प्रदेश—यह एक ऐसा नाम है जो हाल के दिनों में सुर्खियों में आया है, और इस बार वजह कुछ और नहीं बल्कि एक बेहद गंभीर और खतरनाक घटनाक्रम है। 11 और 12 सितंबर को अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर में हुई फायरिंग ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। दो शूटरों ने उनके घर पर हमला किया था, और बाद में उनका एनकाउंटर यूपी पुलिस द्वारा किया गया। लेकिन इस एनकाउंटर के बाद जो हुआ, वह और भी चौंकाने वाला था।
गैंगस्टर रोहित गोदारा, जो खुद को एक खतरनाक अपराधी और गैंग लीडर मानता है, उसने इस एनकाउंटर के बाद यूपी पुलिस को एक धमकी दी। फेसबुक पर पोस्ट करते हुए उसने लिखा कि “हमारे जो दो शूटर मारे गए हैं, हम इसका बदला लेंगे। ये एनकाउंटर हमारे लिए बहुत बड़ी क्षति है, ये ढेर नहीं, शहीद हुए हैं।” इसके बाद रोहित ने यह भी कहा कि यदि किसी का इस मामले में हाथ है, तो उसे चाहे कितनी भी ताकत हो, उसे नहीं बख्शा जाएगा।
इस धमकी से एक बार फिर यह साबित हुआ कि उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधी किस हद तक अपनी पहुंच और ताकत को महसूस करते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ एक बयान है, या सच में इन गैंग्स के पास इतनी ताकत है कि वे पुलिस और कानून व्यवस्था को चुनौती दे सकें?
क्या है पूरा मामला?
बरेली में 11 और 12 सितंबर को दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग की घटना हुई थी। यह हमला किसी निजी विवाद या समस्या का परिणाम नहीं था, बल्कि एक गैंगवार का हिस्सा था। शूटरों की पहचान हरियाणा के अरुण और रविंद्र के रूप में हुई। दोनों पेशेवर शूटर थे और रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ के गैंग का हिस्सा थे। इस हमले के बाद, यूपी पुलिस ने मिलकर हरियाणा और दिल्ली पुलिस के साथ इन शूटरों को ढूंढ निकाला और उनका एनकाउंटर कर दिया।
एनकाउंटर के बाद जब रोहित गोदारा ने धमकी दी, तो उसका यह कहना था कि उनके शूटरों का हत्या नहीं, बल्कि बलिदान हुआ है। उसने इसे सनातन धर्म से जोड़ते हुए यह भी आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर चंदा और धंधा चल रहा है। गोदारा का कहना था कि जिस दिन तक उनके शूटरों को इंसाफ नहीं मिलता, वह हर कदम उठाएंगे।
क्या यह गैंग्स का प्रभाव है?
यह सच है कि उत्तर प्रदेश में अपराध की दुनिया में कई गैंग्स सक्रिय हैं। इन गैंग्स की अपनी पहचान, अपनी ताकत, और अपने तरीके हैं। इनमें से कुछ गैंग्स तो राजनीति से भी जुड़े होते हैं और उनके पास इतना असर होता है कि वे पुलिस और प्रशासन को भी चुनौती दे सकते हैं। हालाँकि, पुलिस की मेहनत से इन गैंग्स के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है? क्या इन गैंग्स के प्रभाव को पूरी तरह से नष्ट किया जा सकता है?

उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्रवाई को देखकर एक सवाल तो यही उठता है कि क्या अब पुलिस को अधिक सख्त कदम उठाने होंगे? क्या केवल एनकाउंटर से इन अपराधियों की दुनिया खत्म हो सकती है? या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश चल रही है, जिसे हमें समझने की आवश्यकता है?
