श्रमिक शोषण और मानव तस्करी की जांच में कोई भी सबूत नहीं मिला
baps temple labor exploitation न्यू जर्सी, बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) के न्यू जर्सी स्थित मंदिर के खिलाफ श्रमिक शोषण और मानव तस्करी के आरोपों की जांच अब अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यू जर्सी ने बंद कर दी है। जांच में यह आरोप लगे थे कि मंदिर निर्माण के दौरान श्रमिकों को बहुत कम वेतन दिया गया था और उनका शोषण किया गया था। खासकर यह आरोप था कि श्रमिकों को प्रति घंटे केवल 1.20 डॉलर का ही भुगतान किया गया था और वे भारत से बहला-फुसलाकर लाए गए थे।

इस मामले की जांच 2021 में शुरू हुई थी और अब जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह सभी आरोप गलत साबित हुए हैं। जांच में यह भी पुष्टि हुई कि मंदिर के निर्माण कार्य में लगे श्रमिक स्वयंसेवक थे और न ही कोई मानव तस्करी हुई थी।
अमेरिकी जांच एजेंसियों ने कहा- कोई गलत काम साबित नहीं हुआ
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि बीएपीएस के खिलाफ किसी भी गलत काम के सबूत नहीं मिले। इसके चलते 18 सितंबर को जांच को बंद कर दिया गया।
BAPS का बयान
इस मामले पर BAPS संस्था ने अपनी सफाई में कहा
स्वामीनारायण अक्षरधाम, शांति, सेवा और भक्ति का स्थान है। मंदिरों का निर्माण हजारों भक्तों के समर्पण और स्वैच्छिक प्रयासों से किया जाता है। बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम इस बात का स्थायी प्रतीक है कि यह समुदाय राष्ट्र के ताने-बाने का हिस्सा है।
न्यू जर्सी में बीएपीएस मंदिर का महत्व
न्यू जर्सी के रॉबिंसविले में स्थित बीएपीएस का स्वामीनारायण मंदिर भारत के बाहर सबसे बड़ा स्वामीनारायण मंदिर है। यह मंदिर 162 एकड़ में फैला हुआ है और अपनी अद्वितीय वास्तुकला और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है। इस मंदिर के निर्माण में 12,500 स्वयंसेवकों ने दिन-रात काम किया और यह मंदिर 134 फीट लंबा और 87 फीट चौड़ा है।
मंदिर में शिल्प कौशल और कलात्मकता का अद्भुत मिश्रण
यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि इसमें 10,000 से अधिक मूर्तियां और भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों की नक्काशी की गई है। इसके परिसर में 300 से अधिक पवित्र भारतीय नदियां भी उकेरी गई हैं, जो शिल्पकला और भारतीय संस्कृति का बेहतरीन उदाहरण हैं।

मंदिर का उद्देश्य और सामाजिक योगदान
बीएपीएस मंदिर न केवल पूजा स्थल है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में कार्य करेगा। यह एकता, शांति और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित रहेगा और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा।
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