एटीएम, नकद लेनदेन, क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन और अब IMPS जैसी सेवाओं पर भी शुल्क
नई दिल्ली: भारतीय बैंकों ने अब ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर चार्ज बढ़ा दिए हैं, जिससे अब बैंकिंग की छोटी-मोटी सुविधाएं भी महंगी हो गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने कई प्रकार के शुल्कों को लागू कर दिया है, जिनका भुगतान अब ग्राहकों को करना पड़ता है। इसमें एटीएम निकासी, नकद लेनदेन, क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन और अब IMPS जैसी सेवाओं पर भी शुल्क लगाया गया है।

क्या बदल रहा है?
- एटीएम निकासी पर शुल्क
मई 2025 से बैंकों ने एटीएम से पाँच बार से अधिक पैसे निकालने पर शुल्क लगा दिया था। अब हर अतिरिक्त निकासी पर ₹23 का शुल्क लिया जाता है। - नकद लेनदेन पर चार्ज
अब बैंक शाखाओं या एटीएम से एक महीने में सिर्फ तीन बार मुफ्त नकद जमा या निकासी की जा सकती है। इसके बाद हर बार ₹150 का भारी शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा, अगर आप एक महीने में ₹1 लाख से अधिक नकद जमा करते हैं तो भी आपको ₹150 का शुल्क देना होगा। - SBI के क्रेडिट कार्ड पर कटौती
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने ‘प्राइम’ और ‘पल्स’ क्रेडिट कार्ड के 50 लाख रुपये के मुफ्त हवाई दुर्घटना बीमा को 15 जुलाई से समाप्त कर दिया है। - IMPS सेवा पर शुल्क
अब SBI ने 15 अगस्त 2025 से IMPS (इंस्टैंट मनी ट्रांसफर सेवा) पर शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। हालाँकि, कई निजी बैंक पहले ही इस सेवा पर शुल्क ले रहे हैं। SBI के IMPS शुल्क की सूची इस प्रकार है:- 1,000 रुपये तक: फ्री
- 1,001 रुपये से ₹10,000 तक: ₹2 + जीएसटी
- ₹10,001 से ₹1,00,000 तक: ₹4 + जीएसटी
- ₹1,00,001 से ₹2,00,000 तक: ₹12 + जीएसटी
- ₹2,00,001 से ₹5,00,000 तक: ₹20 + जीएसटी
अन्य सामान्य बैंकिंग शुल्क
- SMS अलर्ट: ₹10 से ₹35 प्रति तिमाही
- डुप्लिकेट पासबुक: ₹100
- चेक भुगतान रोकने पर: ₹200 से ₹500
- चेक वापसी पर: ₹150
- हस्ताक्षर सत्यापन: ₹100
- डेमांड ड्राफ्ट (₹5,000 – ₹10,000): ₹75
- डेबिट कार्ड रखरखाव शुल्क: ₹250 से ₹800
- डेबिट कार्ड री-पिन बदलने पर: ₹50
- डाक शुल्क: ₹50 से ₹100
क्या इसका असर होगा?
इस बढ़ती शुल्क संरचना से बैंकों की सेवाएं महंगी हो रही हैं, जिससे ग्राहकों की जेब पर और अधिक बोझ पड़ेगा। ग्राहकों को अब हर छोटी-मोटी सेवा के लिए शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा, जिससे बैंकिंग सेवाओं को लेकर उनकी निराशा बढ़ सकती है। ऐसे में ग्राहकों को अपनी बैंकिंग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से निर्णय लेना होगा।


