bangladesh violence news: बांग्लादेश इन दिनों उबल रहा है। राजधानी ढाका की हवा में तनाव, डर और गुस्सा आपस में घुलते नजर आते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर आने वाले फैसले ने पूरे देश को बेचैन कर दिया है। अदालत का दिन नजदीक है और सड़कें पहले ही बेकाबू होती जा रही हैं।

पिछले चौबीस घंटे बांग्लादेश के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे। बुधवार को एक के बाद एक 32 धमाकों ने ढाका समेत कई शहरों को हिला दिया। दर्जनों बसें धू-धू कर जलती रहीं और लोग अफरा-तफरी में रास्ते तलाशते रहे। गुरुवार रात एयरपोर्ट के पास दो और धमाके हुए। इन्हें देखकर साफ लगा कि स्थिति कब बिगड़ेगी, इसका अंदाजा अब किसी को नहीं है।
लॉकडाउन जैसी हालत, सड़कें वीरान
हसीना की पार्टी अवामी लीग ने फैसले से पहले देशव्यापी लॉकडाउन की मांग की। इसका असर सीधे सड़कों पर दिखा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट लगभग ठप हो गया। स्कूलों को ऑनलाइन क्लास पर भेज दिया गया। कई इलाकों में बाजार अपना शटर गिराकर घरों को लौट गए।
ढाका में स्थिति इतनी गंभीर हुई कि….
करीब 400 पैरामिलिट्री जवान तैनात करने पड़े। शहर के कई हिस्सों में सुरक्षा बलों का पहरा ऐसा है कि लोग खिड़कियों से बाहर झांकने में भी हिचक रहे हैं। उधर BNP और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। कई जगह मशाल जुलूस, टायर जलाने और पथराव की खबरें आईं। इन्हें रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को लगातार मोर्चे पर रहना पड़ा।
हसीना का पलटवार- केस को बताया “झूठा तमाशा”
तनाव के बीच हसीना ने अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने साफ कहा कि उनके खिलाफ दर्ज केस एक “झूठा तमाशा” है। BBC को दिए इंटरव्यू में वे बोलीं कि छात्र आंदोलन पर गोली चलाने का आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है।
यह मामला 2024 के उस छात्र विरोध से जुड़ा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक 1,400 तक लोगों की मौत हुई थी। अदालत में एक लीक ऑडियो भी पेश किया गया था, जिसमें हसीना को सुरक्षा बलों को हथियार इस्तेमाल करने की बात कहते सुना गया। हसीना ने इस ऑडियो को गलत संदर्भ में पेश किया गया बताकर खारिज कर दिया। वे यहां तक कह गईं कि सरकार चाहे तो इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में केस ले जाए। उनका दावा है कि निष्पक्ष अदालत उन्हें दोषी नहीं ठहरा सकती।
ढाका की सड़कों पर खौफ, लोगों के मन में सवाल
ढाका इस वक्त दो हिस्सों में बंटा लगता है एक तरफ वे लोग हैं जो मानते हैं कि हसीना के खिलाफ मामला राजनीतिक बदला है। दूसरी तरफ वे हैं जो कहते हैं कि 2024 की हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत का जिम्मा तय होना चाहिए।
इसी बीच आम लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। परिवहन बंद, स्कूल बंद और हर दो घंटे में किसी नए इलाके से हिंसा की खबर। ढाका में रहने वाली 32 वर्षीय राबिया बताती हैं, “हमने दंगों के बारे में सुना था, पर लगातार धमाकों की आवाजें पहली बार महसूस की हैं।”
17 नवंबर का फैसला देश की दिशा तय करेगा
सुप्रीम कोर्ट का 17 नवंबर को आने वाला फैसला सिर्फ एक नेता का भविष्य तय नहीं करेगा। यह बांग्लादेश में सत्ता, आंदोलन और न्याय के संतुलन को भी परखेगा। ढाका की सड़कों पर खड़े काले धुएं, टूटे शीशों और जली बसों के बीच लोग एक ही बात पूछ रहे हैं— क्या फैसले के बाद हालात और बिगड़ेंगे?
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