बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमलों की खबरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं, बीते 15 दिनों में चौथे हिंदू नागरिक की मौत ने एक बार फिर हालात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं 50 वर्षीय कारोबारी खोकन चंद्र दास पर 31 दिसंबर को हमला हुआ था, वह शरियतपुर जिले के दामुद्या इलाके में केउरभांगा बाजार के पास अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में उन पर घात लगाकर हमला किया गया ।
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स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हमलावरों ने उन्हें बुरी तरह पीटा और धारदार हथियार से घायल कर दिया, इसके बाद आग लगने की वजह से उनकी हालत और गंभीर हो गई. जान बचाने की कोशिश में खोकन पास के तालाब की ओर भागे जहां आसपास के लोगों ने शोर मचाया इसी अफरा-तफरी में हमलावर मौके से फरार हो गए।
इलाज चला, लेकिन जान नहीं बची
घटना के बाद स्थानीय लोग उन्हें तुरंत शरियतपुर सदर अस्पताल ले गए, हालत बिगड़ने पर उन्हें ढाका रेफर किया गया जहां तीन दिनों तक इलाज चला. डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद शनिवार को उनकी मौत हो गई. अस्पताल सूत्रों का कहना है कि चोटें और जलने की वजह से शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा था जिससे उबर पाना मुश्किल हो गया ।
15 दिन, 4 मौतें: बढ़ती चिंता
खोकन चंद्र दास की मौत कोई अकेली घटना नहीं है। बीते दो हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के चार लोगों की हत्या हो चुकी हैहालिया घटनाओं पर एक नजर डालें तो 18 दिसंबर: दीपू चंद्र दास की हत्या,24 दिसंबर: 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या, 29 दिसंबर: मैमनसिंह जिले में कपड़ा फैक्ट्री कर्मचारी बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या और खोकन चंद्र दास पर 31 दिसंबर हमला, 4 जनवरी मौत. इन घटनाओं ने न सिर्फ स्थानीय हिंदू समुदाय में डर का माहौल पैदा किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
