IPL की शुरुआत 2008 में हुई थी, और तब से लेकर अब तक यह दुनिया की सबसे अमीर और सबसे पॉपुलर स्पोर्ट्स लीगों में से एक बन चुकी है। हर साल आईपीएल में देश-विदेश के नामी क्रिकेटरों की भीड़ होती है, और 2025 के मेगा ऑक्शन में इटली जैसे देशों के खिलाड़ियों ने भी रजिस्टर किया था। लेकिन, एक बड़ा सवाल यह है कि जब इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के खिलाड़ी आईपीएल में खेल सकते हैं, तो आखिर पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर आईपीएल में खेलने पर बैन क्यों है?
आईपीएल में क्यों नहीं खेलते पाकिस्तानी खिलाड़ी?
आईपीएल 2008 का आयोजन 18 अप्रैल से 1 जून के बीच हुआ था, और पहले सीजन का फाइनल राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 3 विकेट से हराकर जीता था। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ महीने बाद मुंबई में आतंकी हमला होगा, और यही हमला आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के भविष्य को प्रभावित करेगा।
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब का नाम सामने आया, जिसने खुलासा किया कि हमले की योजना पाकिस्तान में बनाई गई थी। इसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने तत्काल प्रभाव से पाकिस्तानी क्रिकेटरों पर आईपीएल में खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया।
पाकिस्तान के खिलाड़ी क्यों नहीं लौटे?
2008 के मुंबई हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में गंभीर तनाव आया। दोनों देशों के बीच क्रिकेट और अन्य खेलों में कोई तालमेल नहीं रहा। भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने से साफ इनकार कर दिया, और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी भारत के साथ भविष्य में कोई मैच खेलने की संभावना को समाप्त कर दिया। इसके चलते, पाकिस्तानी खिलाड़ी कभी भी आईपीएल में वापस नहीं लौट पाए।
आज भी भारत और पाकिस्तान के बीच कोई द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला नहीं खेली गई है, और 2012-13 सीरीज के बाद से दोनों देशों के बीच कोई सीरीज नहीं हो पाई। इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी प्रकार की क्रिकेट या अन्य खेल संबंधी बातचीत पर रोक लगी हुई है।
IPL 2008 में पाकिस्तानी खिलाड़ियों का प्रदर्शन
आईपीएल 2008 में कुल 11 पाकिस्तानी खिलाड़ी खेलते हुए नजर आए थे। इनमें शोएब अख्तर, शाहिद अफरीदी, सोहेल तनवीर, मोहम्मद आसिफ जैसे बड़े नाम शामिल थे। पाकिस्तान के सोहेल तनवीर ने आईपीएल के पहले सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने के लिए पर्पल कैप जीती थी। उन्होंने 11 मैचों में 22 विकेट लेकर सभी को प्रभावित किया।
हालांकि, 2009 के बाद से पाकिस्तानी क्रिकेटरों का आईपीएल में आना बंद हो गया। बीसीसीआई के बैन और भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में आए तनाव ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल में शामिल होने से रोक दिया।
निष्कर्ष
आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेलने पर प्रतिबंध की शुरुआत 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद हुई थी, और इसके पीछे भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) और सरकार की सुरक्षा और राजनीतिक चिंताएँ प्रमुख कारण रही हैं। आज, जबकि आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स लीग बन चुका है, पाकिस्तानी खिलाड़ियों का वापस आना फिलहाल संभव नहीं दिखता है, जब तक दोनों देशों के बीच संबंधों में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं होता।
