छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में लुत्तीसरसा क्षेत्र का पुराना मिट्टी का बांध टूटने से गंभीर नुकसान हुआ है। इस हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन लोग अभी भी लापता हैं। बांध टूटने के कारण चार घर पूरी तरह बह गए, जिनमें कई परिवार के सदस्य फंसे। प्रशासन और रेस्क्यू टीमों ने घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
चार घर बाढ़ की चपेट में आए
बांध टूटने से निचले इलाके के 4 घर बाढ़ की चपेट में आकर बह गए। हादसे में इन घरों के 7 लोग चपेट में आ गए। घटना की सूचना पर देर रात से रेस्क्यू टीम के साथ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। बलरामपुर जिले में दो दिनों से हो रही बारिश से बांध लबालब हो गया था। यह मिट्टी का बांध है, जो साल 1981 में बनाया गया था। ओवर फ्लो होने के कारण बीच मेड़ टूट गई और बांध बह गया।
मृतकों के शव मिले
बांध टूटने से बहे गणेश खैरबार के बड़े बेटे कार्तिक खैरबार का शव बुधवार सुबह मिल गया है। वह कक्षा पहली का छात्र था। गणेश खैरबार के छोटे बेटे का पता नहीं चला है। वह आंगनबाड़ी में पढ़ता था। बाढ़ में बही एक अन्य महिला चिंता का शव भी मिल गया है।बाढ़ में बहे संजीवन की बेटी प्रिया (6 वर्ष), सहित दो बच्चे और गणेश खैरबार की तलाश की जा रही है। बाढ़ में जीतन राम की करीब 60 बकरियां भी बह गई।
लोगों ने तैरकर बचाई जान
ग्रामीणों ने बताया कि रात को जब बांध टूटा तो सबसे पहले पानी का सैलाब कालीचरण टोप्पो के घर पहुंचा। जिससे परिवार के 11 अन्य सदस्य पानी में बहने लगे। कालीचरण टोप्पो ने बांस को पकड़ लिया, जिससे उसकी जान बच गई।कालीचरण की पत्नी फुलमनी टोप्पो दीवार के नीचे दब गई थी, जिसे बाद में निकाला गया। दोनों घायल हो हैं। कालीचरण के परिवार के अन्य सदस्यों ने तैरकर जान बचाई।इसके बाद पानी का सैलाब रामवृक्ष खैरबार के घर पहुंचा, जिसमें उसका पूरा घर और परिवार के सभी सदस्य बह गए। रामवृक्ष झाड़ी पकड़कर बाहर निकल गया। उसकी पत्नी, बेटा दो बहुएं
पूर्व विधायक ने जल संसाधन को बताया जिम्मेदार
घटनास्थल पर बुधवार सुबह पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह पहुंचे। पूर्व विधायक ने कहा कि बांध क्षतिग्रस्त हो गया था। इसकी सूचना ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को दी थी, लेकिन मरम्मत नहीं की गई। बांध मुरम वाली मिट्टी से बना था, जो ज्यादा पानी बर्दाश्त नहीं कर सका और बह गया।
धान और सब्जि की फसल बर्बाद
जहां बांध बहा है, वहां से कन्हर नदी की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। बाढ़ में बहे लागों की खोजबीन में सैकड़ों लोग जुटे हैं। अब तक कुछ लापता लोगों का पता नहीं चला है। अन्य ग्रामीणों के घर बहे, लेकिन इनके सदस्य बच गए।बाढ़ की चपेट में आकर ग्रामीणों की सैकड़ों एकड़ में लगी धान और टमाटर सहित अन्य फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ की चपेट में आकर ग्रामीणों के कई मवेशी भी बह गए हैं। कुछ की खूंटे में बंधी हालत में मौत हो गई।
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