Ballia Kidnapping Case Update: बलिया जिले के सुखपुरा थाना क्षेत्र के घोसौती गांव में 3 मई 2025 की रात हुए अजय तिवारी के कथित अपहरण के हाई-प्रोफाइल मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया था, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी तीखी बहस का कारण बना। शुरुआत में इसे गंभीर अपराध मानकर पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की थी, लेकिन अब पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए इसे फर्जी करार दिया है। बलिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ओमवीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अजय तिवारी ने स्वयं पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर स्पष्ट किया कि उनका कोई अपहरण नहीं हुआ था।
घटना का प्रारंभिक विवरण
3 मई की रात डायल 112 पर मिली सूचना के आधार पर पुलिस को बताया गया कि अजय तिवारी का थार गाड़ी और बाइकों से सशस्त्र बदमाशों ने अपहरण कर लिया। परिवार के विरोध करने पर बदमाशों ने मारपीट भी की। इस सूचना के बाद पुलिस ने तत्काल चार टीमें गठित कीं और सघन तलाशी अभियान शुरू किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुखपुरा थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया था और जांच तेज कर दी गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस को यह मामला संदिग्ध लगा, लेकिन राजनीतिक दबाव और मीडिया कवरेज के कारण इसे हाई-प्रोफाइल माना गया।

अजय तिवारी की वापसी और खुलासा
13 दिनों बाद, 12 मई 2025 की शाम को अजय तिवारी स्वयं बलिया पुलिस कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पुलिस को बताया कि पारिवारिक विवाद के कारण वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर किसी तीर्थस्थल के लिए निकल गए थे। एसपी ओमवीर सिंह ने प्रेस को बताया कि अजय के इस बयान के बाद नामजद सभी आरोपियों को छोड़ दिया गया है। साथ ही, फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पुलिस ने इस मामले को सुनियोजित साजिश का हिस्सा मानते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है।
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Ballia Kidnapping Case Update: राजनीतिक विवाद और आरोप
इस मामले ने स्थानीय राजनीति को भी गरमा दिया था। सत्ता पक्ष के नेताओं, विशेष रूप से पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी और बीजेपी विधायक केतकी सिंह ने एक विशेष समुदाय पर अपहरण का आरोप लगाते हुए कठोर कार्रवाई और बुलडोजर की मांग की थी। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला अध्यक्ष और फेफना विधायक संग्राम सिंह यादव ने इसे सत्ता पक्ष की साजिश करार दिया। उन्होंने उपेंद्र तिवारी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मामला जातिगत कार्ड खेलकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश थी। सपा नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जो अब पुलिस के खुलासे के बाद सही साबित हुई।

सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
इस घटना ने क्षेत्र में सामाजिक तनाव को बढ़ाया था। सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने इसे जातिगत उत्पीड़न से जोड़कर चर्चा की। पुलिस के इस खुलासे ने उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया, जो बिना सबूत के लगाए गए थे। एसपी ओमवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस निष्पक्षता के साथ काम कर रही है और किसी भी साजिश को बेनकाब करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अमित कुमार की रिपोर्ट
