Bahraich Santoshi Mata Temple: यह मंदिर 1969 में एक स्थानीय सेठ द्वारा बनवाया गया था, जिन्होंने संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर देवी की आराधना की प्रतिज्ञा पूरी की। मंदिर के निर्माण में कानपुर के कारीगरों ने सुंदरता और जटिलता का समावेश किया, जो आज भी कारीगरी की मिसाल है।
स्थानीय विश्वास के अनुसार, मंदिर का निर्माण स्थान, जहां देवी विराजमान हैं, लगभग 1,000 वर्ष पहले आए हिंदू समाज की आस्थाओं की धरोहर को दर्शाता है
तीन रूपों में प्रकट होती हैं माता…
इस मंदिर की सबसे ऐतिहासिक मान्यता यह है कि प्रतिदिन यहां मां संतोषी दिन में तीन बार अपना स्वरुप बदलती है —बाल्यावस्था, प्रौढ़ावस्था और युवावस्था में देवी का दर्शन होता है। सुबह बाल्यावस्था की मासूमियत, दोपहर में प्रौढ़ावस्था और शाम को युवावस्था में शक्ति की झलक दिखाई देती है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इन रूपों में मां संतोषी प्रत्येक रूप से भक्तों की विभिन्नइच्छाओं—संतान, विवाह, कामयाबी—की पूर्ति करती हैं।

चमत्कार और आस्था…
यह मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक चमत्कारी केंद्र है। भक्तों का मानना है कि सच्ची मनोकामना के साथ मन्नत मांगने पर इच्छाएं निश्चित रूप से पूरी होती हैं। प्रारंभ में यह मंदिर संतान हेतु विशेष था, लेकिन समय के साथ यहां विवाह, नौकरी, मानसिक संतुलन जैसी विभिन्न इच्छाओं की पूर्तियों की भी मान्यता बनी ।
रहस्यमयी दीवारें और प्राकृतिक शोभा…
मंदिर के द्वार पर बने रहस्यमयी चित्र भक्तों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं। ये चित्र अधर्म के विनाश और धर्म की विजय की कथा बयां करते हैं—बड़े से राक्षस का मुख, उसके भीतर एक और राक्षस, और फिर माता की सुंदर मूर्ति।
इसी तरह, मंदिर लगभग 50 वर्षों से 6 किमी दूर जंगलों के बीच स्थित है, जहां ठंडी हवा, शांत वातावरण और पेड़ों की हरियाली भक्तों को मानसिक सुकून देती है।

शुक्रवार—विशेष दिन
मां संतोषी का विशेष दिन माना जाता है शुक्रवार। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होती है, जिसके बाद भक्त ‘गुड़-चने’ का प्रसाद लेते हैं ।
श्रद्धालुओं के अनुसार, शुक्रवार को मां से की गई प्रार्थना शीघ्र पूर्ण होती है और बहुत से लोग नियमित रूप से इस दिन दर्शन हेतु आते हैं।
पंचमुखी हनुमान—एक और चमत्कार…
मंदिर परिसर में एक पंचमुखी हनुमान जी का मंदिर भी स्थापित है, जिसे एक स्थानीय सेठ ने पुत्र प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर बनवाया था। भक्त यह मानते हैं कि हनुमान जी की कृपा से समान रूप से मन्नतों की पूर्तियां होती हैं।
नवरात्रि में भव्य मेले का आयोजन…
हर वर्ष नवरात्रि में यहां भव्य मेला लगता है। इस दौरान लाखों भक्त माता का आशीर्वाद लेने आते हैं। खासतौर पर दुर्गा नवमी और शुक्रवार को भक्तों की संख्या चरम पर होती है । यह आयोजन श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक मेलजोल का सुन्दर संयोग होता है।

भक्तों के अनुभव और कहानियां…
1. कई श्रद्धालु यह बताते हैं कि दर्शन मात्र से उनकी संतान, विवाह, स्वास्थ्य, आदि की इच्छाओं ने वास्तविक रूप पाया है।
2. भक्त बताते हैं कि यहां की दीवारों पर बनी चित्र-कथाएं आत्मा को झंकृत कर देती हैं और सोचने पर मजबूर करती हैं कि धर्म की विजय कैसे होती है।
3. जंगलों में स्थित शांत वातावरण मानो भक्तों को छींटा दे—यहां की हवा, पक्षियों की चहचहाहट और मंदिर की शांति भक्तों को तनाव-रहित अनुभूति देती है।
भक्तों की आशा और विश्वास का केंद्र…
यह बहराइच का संतोषी माता मंदिर न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, अपितु भक्तों की आशा और विश्वास का जीता जागता केन्द्र भी है। अगर आप भी अद्भुत चमत्कारों और आस्था का अनुभव करना चाहते हैं, तो यहां की तीन रूपों की दर्शन और प्राकृतिक शांति को महसूस करें। मंदिर आस्था और आंतरिक शांति की वह जगह है जहां माता संतोषी भक्तों की दुनिया में वास्तविक रूप से परिवर्तन लेकर आती हैं।
