Bahraich Dargah Mela News: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर सैकड़ों वर्षों से लगने वाला ऐतिहासिक मेला इस बार प्रशासनिक रोक के कारण चर्चा में है। जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस मेले पर रोक लगा दी है, जिसके बाद दरगाह इंतेजामिया कमेटी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, 7 मई को हुई सुनवाई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कमेटी को कोई राहत नहीं दी और मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है।
मेले पर रोक से मायूसी का माहौल
सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर हर साल 15 मई से 15 जून तक आयोजित होने वाला ‘जेठ मेला’ न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह मेला सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक माना जाता रहा है। लेकिन इस बार प्रशासन के फैसले ने मेला परिसर में सन्नाटा पसार दिया है। दरगाह कमेटी के अध्यक्ष बकाउल्लाह ने कहा, “यह मेला हमारी परंपरा का हिस्सा है। प्रशासन का यह फैसला हमारे समुदाय के लिए निराशाजनक है, लेकिन हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।”
प्रशासन का रुख और हिंदू संगठनों की मांग
जिला प्रशासन ने हाल ही में एक पत्र जारी कर दरगाह कमेटी को मेला आयोजन की अनुमति न देने की बात कही। प्रशासन ने इस फैसले के पीछे कानून-व्यवस्था की स्थिति को कारण बताया, खासकर हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़े तनाव को देखते हुए। इसके अलावा, संभल जिले में सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर लगने वाले नेजा मेले पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है, जिसके बाद बहराइच में भी इसी तरह का फैसला लिया गया। दूसरी ओर, कई हिंदू संगठनों ने भी इस मेले को बंद करने की मांग की है। उनका दावा है कि सैयद सालार मसूद गाजी एक “विदेशी आक्रांता” थे, और इस मेले का आयोजन ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है।
उच्च न्यायालय में दायर याचिका
प्रशासन के फैसले के खिलाफ दरगाह कमेटी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यदि देवी पाटन मेला जैसे अन्य आयोजन शांतिपूर्वक हो सकते हैं, तो बहराइच के जेठ मेले को रोकने का कोई औचित्य नहीं है। कमेटी ने तर्क दिया कि यह मेला दशकों से बिना किसी बड़े विवाद के आयोजित होता रहा है और इसे रोकना धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है। हालांकि, 7 मई की सुनवाई में कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया और अगली सुनवाई 14 मई को तय की।
Bahraich Dargah Mela News: समुदाय में बढ़ता असंतोष
मेले पर रोक के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है। कई लोगों का मानना है कि यह फैसला सांप्रदायिक आधार पर लिया गया है। एक स्थानीय मदरसा शिक्षक कारी नसीम ने कहा, “जब कांवड़ यात्रा जैसे आयोजन बिना किसी रोक-टोक के हो सकते हैं, तो हमारे शांतिपूर्ण मेले को क्यों रोका जा रहा है? यह सुरक्षा का नहीं, बल्कि नियंत्रण का मामला है।” दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यापक जनहित में लिया गया है।
अखिलेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट
