Kedarnath Baba Doli arrival Ukhimath 2025 : भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह डोली केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के साथ अपनी शीतकालीन यात्रा पर निकल गई। यह यात्रा कई पड़ावों से होकर गुजरती हुई ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर पहुंची। यहां छह महीने तक बाबा केदार की पूजा-अर्चना शीतकालीन गद्दीस्थल पर की जाएगी। डोली पर सोने का मुकुट सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं की भक्ति और आस्था का प्रतीक है।
शीतकालीन पूजा का महत्व
ऊखीमठ पहुंचने के बाद, ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की भोग मूर्तियों की स्थापना की गई। इसके साथ ही वेदपाठियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अनुष्ठान संपन्न हुए। यह पूजा दर्शनार्थियों को 13 वर्षों तक दर्शन का अवसर प्रदान करती है और धार्मिक आस्था को मजबूत करती है।
भक्तों की श्रद्धा और उत्साह
डोली यात्रा के हर पड़ाव पर हजारों श्रद्धालु पुष्प वर्षा और भव्य स्वागत करते हैं। ऊखीमठ में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, जो बाबा केदार के दर्शन और पूजा में सम्मिलित होते हैं। इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और धार्मिक उत्सव का आनंद लेते हैं।
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सांस्कृतिक महत्व
ओंकारेश्वर मंदिर न केवल शीतकालीन गद्दीस्थल है, बल्कि पंचकेदारों के संयुक्त दर्शन स्थल के रूप में भी विख्यात है। यह क्षेत्र शीतकालीन पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है और केदारघाटी में धार्मिक, सांस्कृतिक गतिविधियां यहां के अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाती हैं।
बाबा केदार की शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ में उनकी डोली का आगमन श्रद्धालुओं के लिए उत्साह का विषय है। छह महीने तक चलने वाली इस पूजा परंपरा से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा होती है। यह आयोजन न केवल भक्तजनों के लिए बल्कि पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।
