ईंट उठा खुद बनाया चूल्हा फिर बनाई गरमागर्म चाय
छतरपुर से बागेश्वर सरकार धाम पहुंचे पंड़ित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जमीन पर बैठकर देसी चूल्हे पर बनाई चाय, बाबा का निराला अंदाज देख लोग हैरान हो गए.
पुजारी के लिए प.धीरेंद्र शास्त्री ने बनाई चाय
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. उनके वीडियो को लोगों का खूब सारा प्यार मिल रहा है. बाबा बागेश्वर का यह अंदजा देखकर उनके भक्त भी हैरान रह गए हैं. दरअसल गुरुवार को पंडित धीरेंद्र शास्त्री खजुराहो स्थित त्रिलोखर सरकार धाम के समाधि स्थल पहुंचे. जहां उन्होंने सबसे पहले हनुमान जी के दर्शन किए. इसके बाद वहां के पुजारी ने बाबा बागेश्वर को चाय की पेशकश की, जैसे ही चाय बनाने का सामान आया. बाबा बागेश्वर स्वयं जमीन पर बैठकर चाय बनाने लगे.
त्रिलोखर धाम पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री
बता दें कि, बुधवार की देर रात पंडित धीरेंद्र शास्त्री जलबपुर दौरे से लौटकर बागेश्वर धाम पहुंचे थे. अचानक सुबह उठकर शिष्यों से बोले-चलो चलना है. सारे चेले और सुरक्षा अधिकारी चौकन्ना हो गए. बाबा बागेश्वर खुद गाड़ी चलाकर निकल पड़े और अचानक खजुराहो रोड पर गाड़ी मोड़ दी. खजुराहो स्थित त्रिलोखर सरकार धाम के समाधि स्थल पर पहुंचे गए. जहां मंदिर के पुजारी ने बाबा बागेश्वर से चाय पीने का आग्रह किया. बाबा चाय पीने के लिए तैयार तो हो गए, लेकिन शर्त यह कि चाय वह खुद बनाएंगे. यह नजारा देखकर वहां मौजूद भक्त और शिष्य हैरान रह गए.
चूल्हे पर बाबा बागेश्वर ने बनाई चाय
त्रिलोखर धाम में चाय का सामान आया तो बाबा चाय बनाने के लिए जमीन पर पलथी मारकर बैठ गए. पहले उन्होंने पेड़ के नीचे ईंटों का चूल्हा बनाया और इस दौरान उनके शिष्यों ने लकड़ियां इकट्ठा की. फिर क्या था बाबा बागेश्वर ने चूल्हा जलाया और चाय बनाने बाला बर्तन चढ़ा दिया. वहीं इस दौरान मौजूद भक्तों में से किसी ने बोला बाबा आप रहने दें. हम गैस पर चाय बनाकर कर ले आते हैं. बाबा हंसते हुए बोले, “गैस वाली चाय गैस बनाती है. उसमें स्वाद नहीं होता है.”
बाबा का अंदाज देख भक्त हैरान
बता दें कि, बाबा बागेश्वर चाय के बहुत शौकीन हैं. दिन में कई बार चाय पीते हैं. बाबा के इस अनोखे और निराले अंदाज को देख कर लोग खुश भी हैं और जो उनको नहीं जानते वह हैरान भी हैं. बाबा बागेश्वर का यह निराला अंदाज अब लगातार वायरल हो रहा है. वहीं, बाबा बागेश्वर के सेवादार अभिलाष पटेल बताते हैं, “हमारे गुरु बहुत ही सरल, सहज हैं. सभी को एक नजर से देखते हैं कोई छोटा बड़ा नहीं है. सभी को एक समान प्रेम स्नेह देते हैं, उनको ये कभी नहीं लगता हम कहां बैठे क्या कर रहे हैं, वह मनमौजी हैं.”
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