अजरबैजान को पाकिस्तान से कश्मीर मुद्दे पर समर्थन की कीमत चुकानी पड़ेगी?

अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने भारत पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत, अजरबैजान की SCO (शंघाई सहयोग संगठन) में एंट्री रोक रहा है, क्योंकि अजरबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। यह आरोप शहबाज शरीफ से मुलाकात के दौरान लगाया गया, जब दोनों नेताओं ने ऑपरेशन सिंदूर और कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की।
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान का समर्थन
22 अप्रैल को पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 6-7 मई को ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसमें पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस ऑपरेशन के बाद अजरबैजान ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया और भारत की निंदा की।
शहबाज शरीफ ने अजरबैजान का दौरा किया और अलीयेव को भारत के खिलाफ समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। अलीयेव ने भी कहा कि पाकिस्तान के साथ उनके रिश्ते प्राथमिकता हैं, भले ही भारत उनका SCO में विरोध करे।
भारत का रुख: आर्मेनिया के साथ बढ़ा रक्षा सहयोग
अजरबैजान का आर्मेनिया के साथ नागोर्नो-कराबाख को लेकर विवाद रहा है। पाकिस्तान और तुर्किये अजरबैजान का खुला समर्थन करते हैं, जबकि भारत ने आर्मेनिया के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है।
जुलाई 2023 में भारत ने आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट लॉन्चर का पहला शिपमेंट दिया था। इससे अजरबैजान नाराज हुआ और उसने भारत के राजदूत से मुलाकात कर चिंता जताई थी।
चीन का समर्थन: अजरबैजान को SCO में मिल सकती है सदस्यता?
चीन ने अजरबैजान की SCO सदस्यता का समर्थन किया है। शी जिनपिंग ने अलीयेव से मुलाकात में यह ऐलान किया। हालांकि, भारत की विरोधी भूमिका के कारण अजरबैजान की सदस्यता रुक सकती है, क्योंकि SCO में सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है।

SCO सदस्यता के नियम: भारत की क्या भूमिका?
SCO में पूर्ण सदस्यता के लिए:
- देश को पहले ऑब्जर्वर या डायलॉग पार्टनर होना पड़ता है।
- सदस्य देशों को देश की क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग, और सुरक्षा नीतियों का मूल्यांकन करना होता है।
- सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी है।
भारत ने 2017 में SCO की पूर्ण सदस्यता प्राप्त की थी, लेकिन अब अजरबैजान की सदस्यता पर उसकी विरोधी भूमिका साफ दिखाई दे रही है।
कश्मीर मुद्दे पर समर्थन की कीमत?
अजरबैजान का आरोप भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। कश्मीर मुद्दे पर अजरबैजान का पाकिस्तान का समर्थन भारत के लिए चुनौती बन सकता है। अब सवाल यह है कि क्या भारत, अजरबैजान की SCO सदस्यता रोककर, पाकिस्तान के समर्थकों को एक संदेश दे रहा है?
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