दीपोत्सव के दो चेहरे, एक संदेश

ayodhya deepotsav 2025: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड इस बार दीपावली को दो अलग रूपों में मना रहे हैं। अयोध्या जहां परंपरा, पर्यावरण और आस्था का अद्भुत संगम पेश कर रहा है, वहीं उत्तराखंड धार्मिक स्थलों के विकास और तीर्थाटन को “विकास दीपोत्सव” के रूप में मना रहा है।
अयोध्या दीपोत्सव 2025: आस्था के साथ पर्यावरण का भी ख्याल
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 19 अक्टूबर को दीपोत्सव मनाया जाएगा, जो केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पर्यावरण-संवेदनशील नवाचार का प्रतीक भी होगा। सरयू तट पर लाखों बायोडिग्रेडेबल दीये जलेंगे, जो मिट्टी और गोबर से बनाए गए हैं। इन दीयों से जहां वातावरण को प्रदूषण से बचाया जाएगा, वहीं कुम्हार और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक मजबूती भी मिलेगी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोजन के लिए ग्रीन आतिशबाज़ी और इको-फ्रेंडली तकनीकों का इस्तेमाल सुनिश्चित किया है। आतिशबाज़ी में ऐसे यौगिक प्रयोग में लाए जाएंगे जो कम धुआं और कम कार्बन उत्सर्जित करेंगे। “ग्रीन सूर्य” नाम की आतिशबाज़ी आकाश में बिखरेगी, जो ना धुआं करेगी और ना ही तेज़ शोर। यह आयोजन भव्यता के साथ पर्यावरण संतुलन का भी संदेश देगा।
ayodhya deepotsav 2025: धामी का दावा-4 साल में पहुंचे 24 करोड़ श्रद्धालु
उत्तराखंड सरकार इस बार “विकास दीपोत्सव” मना रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसका ऐलान करते हुए बताया कि यह त्योहार धार्मिक स्थलों पर चल रहे विकास कार्यों को समर्पित है। पिछले चार वर्षों में प्रदेश में लगभग 25 करोड़ श्रद्धालु आए हैं, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला और स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा हुए।
केदारनाथ: सुरक्षा और तकनीक का आधुनिक संगम
केदारनाथ में लगभग 500 करोड़ रुपये के तीन चरणों में विकास कार्य किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा प्रोजेक्ट 12.9 किलोमीटर लंबा ट्राई-केबल रोपवे है, जिससे सोनप्रयाग से केदारनाथ की यात्रा महज़ 36 मिनट में पूरी होगी। यह रोपवे सुरक्षा और तकनीकी दृष्टि से देश का पहला और सबसे आधुनिक माना जा रहा है।
बद्रीनाथ: धार्मिक पर्यटन को नया रूप
बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से काम हो रहा है। 2025-26 के बजट में मंदिर समिति को 127 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिनमें से 64 करोड़ का उपयोग मंदिर क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और सुविधाओं में किया गया। बढ़ती तीर्थयात्रा को देखते हुए यात्री सुविधाओं और आपातकालीन प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है।
यमुनोत्री: पैदल मार्ग का कायाकल्प
यमुनोत्री धाम तक का 3.9 किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग अब वैष्णो देवी की तर्ज़ पर सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा रहा है। इसके लिए लगभग 170 करोड़ रुपये की परियोजना चल रही है, जिससे तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा आसान और सुरक्षित हो जाएगी।
गंगोत्री: आधारभूत ढांचे का नया रूप
गंगोत्री धाम में सड़क, बिजली और तीर्थ यात्री सुविधाओं का नवीनीकरण किया गया है। यहां बुनियादी ढांचे को नया रूप देकर यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और व्यवस्थित अनुभव देने पर जोर दिया गया है।

ayodhya deepotsav 2025: धार्मिक पर्यटन से रोजगार और अर्थव्यवस्था को बल
उत्तराखंड सरकार के अनुसार, तीर्थस्थलों के विकास के चलते राज्य में रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। होटल, टूर गाइड, टैक्सी, खाने-पीने के स्टॉल्स और स्थानीय उत्पादों की बिक्री में तेजी आई है। पंच केदार और अन्य धार्मिक स्थलों के प्रचार-प्रसार से भी यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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